रामनगरी अयोध्या अपनी आध्यात्मिक विरासत, भव्य मंदिरों और सनातन परंपराओं के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां हजारों मंदिर हैं, लेकिन सरयू राजघाट स्थित हनुमान मंदिर की एक अनूठी परंपरा...
समीर शाही, अयोध्या: रामनगरी अयोध्या अपनी आध्यात्मिक विरासत, भव्य मंदिरों और सनातन परंपराओं के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है। यहां हजारों मंदिर हैं, लेकिन सरयू राजघाट स्थित हनुमान मंदिर की एक अनूठी परंपरा इसे विशेष पहचान दिलाती है। यहां प्रतिदिन भगवान बजरंगबली को कई मन बाटी-चोखा का महाभोग अर्पित किया जाता है और फिर यही महाप्रसाद हजारों श्रद्धालुओं में नि:शुल्क वितरित होता है। इस अनोखी सेवा के सूत्रधार हैं मंदिर के महंत बाबा सिया बिहारी, जिन्हें पूरा अयोध्या प्रेम से "बाटी वाले बाबा" के नाम से जानता है। उनके हाथों से बने बाटी-चोखा का स्वाद जितना प्रसिद्ध है, उससे कहीं अधिक उनकी सेवा और समर्पण की भावना लोगों के हृदय में बसती है।
साल 2000 में शुरू हुई परंपरा
साल 2000 में एक छोटे से बालू के मचान से शुरू हुई यह सेवा आज विशाल जनसेवा का स्वरूप ले चुकी है। उस समय भक्तों से मिले दान के अनाज से बाबा पहले हनुमान जी को भोग लगाते थे और फिर उसी भोजन को प्रसाद स्वरूप वितरित करते थे। आज यहां सादी बाटी, सत्तू वाली बाटी, देसी घी की बाटी और सरयू जल में उबाली गई विशेष बाटी तैयार की जाती है। इसके साथ आलू का चोखा, दाल, चावल, दो प्रकार की सब्जियां, धनिया-पुदीने की चटनी, घर का बना आंवले का अचार और ठंडी छाछ श्रद्धालुओं को प्रेमपूर्वक परोसी जाती है।
मंगलवार को उमड़ता है सैलाब
हर मंगलवार यहां आस्था का विशेष सैलाब उमड़ता है। दोपहर 1 बजे से 2 बजे तक मिलने वाला यह महाप्रसाद केवल भोजन नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और सनातन संस्कृति का जीवंत उत्सव है। अयोध्या आने वाला हर श्रद्धालु यदि इस महाप्रसाद का स्वाद चख ले, तो उसकी यात्रा आध्यात्मिक रूप से और भी यादगार बन जाती है।