महिला सशक्तिकरण की प्रतिमूर्ति थीं वीरांगना लक्ष्मीबाई

संघ के निश्चित अधिकारियों ने किया वीरांगना प्रणाम

Update: 2020-06-19 01:00 GMT

ग्वालियर, न.सं.। वीरांगना लक्ष्मीबाई बलिदान दिवस पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कुछ निश्चित अधिकारीगणों ने वीरांगना लक्ष्मीबाई समाधि स्थल पर पहुंचकर वीरांगना प्रणाम किया और श्रद्धांजलि अर्पित की। कोरोना महामारी की वजह से इस बार बड़ी संख्या में स्वयंसेवक वीरांगना प्रमाण में शामिल नहीं हो सके। हालांकि श्रद्धांजलि के उपरांत अधिकारीगणों के प्रबोधन का सीधा प्रसारण संघ के प्रचार विभाग के फेसबुक पेज पर हुआ।

मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. आनंद मिश्रा ने प्रबोधन देते हुए कहा भारतीय वसुंधरा को गौरवान्वित करने वाली झांसी की रानी वीरांगना लक्ष्मीबाई वास्तविक अर्थ में आदर्श वीरांगना थीं। लक्ष्मीबाई साक्षात महिला सशक्तिकरण की प्रतिमूूर्ति थीं। वह दौर ऐसा था जब सारी दुनिया महिला सशक्तिकरण के बारे में कोई नहीं सोचता था। नारी के खुले में घूमना, बोलना, पारस्परिक संवाद करना यह सब मनाही थी। या यू कहें कि जब व्यक्ति सोच भी नहीं सकता था तब वीरांगना लक्ष्मीबाई ने महिला सेना बनाई। वह भी बिना जाति, धर्म, वर्ग व भेदभाव के किले के अंदर महिलाओं की परेड कराना प्रारंभ कर दिया। बाद में महिला टुकड़ी ने भी अंग्रेजों से लोहा लिया। महिला सशक्तिकरण के इस दौर में भला युवतियों और महिलाओं के लिए रानी लक्ष्मीबाई से अधिक बड़ा प्रेरणास्रोत कौन हो सकता है, जिन्होंने पुरुषों के वर्चस्व वाले काल में महज 23 साल की आयु में ही अपने राज्य की कमान संभालते हुए अंग्रेजों के दांत खट्टे कर दिए थे।

उन्होंने कहा कि लक्ष्मीबाई बचपन से ही युद्ध नीति में पारंगत रहीं। गंगाधर राव से विवाह होने के बाद वह राजमहल पहुंची। वहीं से लक्ष्मी का उदय हो गया और राजभवन के अच्छे दिए आ गए। बाद में वे मनु से महारानी लक्ष्मीबाई बन गईं। कभी भी उन्होंने जाति-भेजभाव व तुष्टीकरण की नीति नहीं की। वे अपने सैनिकों का इतना ध्यान रखती थीं कि उनके बारे में एक कहावत थी कि सैनिकों को मलाई खिलाई, खुद ने गुड़ खा ली, अमर रहे झांसी की रानी, अमर रहे झांसी की रानी। वे हमेशा अपने सैनिकों की चिंता व पूछपरख करती थीं। कुलसचिव प्रो. मिश्रा ने बताया कि वीरांगना लक्ष्मीबाई घुड़सवारी में इतनी पारंगत थी उनसे लोहा लेने में अच्छे-अच्छे लोगों के दांत खट्टे हो जाते थे। वह अपनी प्रजा का अपने बच्चों की तरह ख्याल रखती थीं। गरीबों व जरूरतमंतों के लिए किले के दरवाजे हमेशा खुले रहते थे। वीरांगना लक्ष्मीबाई का पूरा जीवन आदर्शवादी व प्रेरणास्रोत रहा। आज की युवा पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में काम करना चाहिए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ग्वालियर विभाग संघचालक श्री राजेन्द्र बांदिल एवं लश्कर जिला संघचालक श्री विजय गुप्ता मंचासीन रहे। संचालन ग्वालियर विभाग कार्यवाह रवि बत्रा ने किया। 

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