545 करोड़ के ग्वालियर स्टेशन प्रोजेक्ट में बड़ी चूक, 101 सरकारी फ्लैट रहने लायक नहीं!

Update: 2026-01-21 07:22 GMT

रेलवे को अभी तक हैंडओवर नहीं हुए आवास, अधिकारियों का दावा-एक महीना और लगेगा

ग्वालियर रेलवे स्टेशन के 545 करोड़ रुपये के बहुप्रचारित पुनर्विकास प्रोजेक्ट में एक चौंकाने वाली तकनीकी लापरवाही सामने आई है। स्टेशन के कायाकल्प के साथ कर्मचारियों के पुराने आवास तोड़कर जो बहुमंजिला इमारतें खड़ी की गईं, वे अब तैयार होने के बावजूद खाली पड़ी हैं। वजह यह है कि रेलवे के इंजीनियर इन सरकारी फ्लैटों को पूरी तरह रहने लायक बनाना ही भूल गए।

रेलवे कॉलोनी में बनाई गई तीन आवासीय इमारतों में कुल 101 फ्लैट तैयार हो चुके हैं, लेकिन इनमें अलमारी और जरूरी फर्नीचर का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। फ्लैटों में किचन, कमरे और लैट-बाथ तो हैं, लेकिन कर्मचारियों के रोजमर्रा के उपयोग की बुनियादी जरूरतों को नजरअंदाज कर दिया गया।

दरअसल ये आम प्राइवेट फ्लैट नहीं, बल्कि सरकारी आवास हैं, जहां कर्मचारी एचआरए के बदले रहते हैं। ट्रांसफर या रिटायरमेंट के बाद उन्हें ये आवास खाली करने होते हैं। ऐसे में कर्मचारी अपनी जेब से लाखों रुपये खर्च कर अलमारी और फर्नीचर बनवाने को तैयार नहीं हैं। यही कारण है कि रेलवे ने आंतरिक स्तर पर फिलहाल फ्लैटों का आवंटन रोक रखा है।

उधर रेलवे के इंजीनियर बाहरी विकास कार्य अधूरे होने का हवाला देकर आवंटन टाल रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि आवंटन होने के बाद भी कर्मचारी इन फ्लैटों का पजेशन लेने से कतरा सकते हैं। अब रेलवे प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन फ्लैटों को उपयोग में लाने के लिए अतिरिक्त पैसा कहां से आएगा।

तीन तरह के फ्लैट, तीन अलग इमारतें

प्लेटफार्म नंबर एक की ओर रेलवे कॉलोनी में दो ब्लॉक बनाए गए हैं। इनमें एक ब्लॉक में सर्वेंट क्वार्टर सहित 24 थ्री-बीएचके फ्लैट हैं, जो छह मंजिला इमारत में बने हैं। इससे सटी हुई दूसरी बिल्डिंग में 26 फ्लैट तैयार किए गए हैं। वहीं दूसरे ब्लॉक में 38 टू-बीएचके फ्लैट बनाए गए हैं। इसके अलावा प्लेटफार्म नंबर चार की ओर तानसेन रोड पर 13 फ्लैटों की एक अलग इमारत बनाई गई है, जिसे रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए तैयार किया गया है।

फर्नीचर के लिए चाहिए 5 करोड़

फ्लैटों में फर्नीचर और अलमारी की कमी सामने आने के बाद रेलवे अफसरों ने इन्हें फर्निश कराने पर चर्चा जरूर की, लेकिन जब लागत का आकलन किया गया तो माथा ठनक गया। एक फ्लैट में सामान्य फर्नीचर पर ही करीब 5 लाख रुपये खर्च आने का अनुमान है। ऐसे में 101 फ्लैटों के लिए करीब 5 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि चाहिए।

अब सवाल यह है कि यह रकम कहां से आएगी और क्या इसे 545 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में जोड़ा जाएगा या फिर इसके लिए नई स्वीकृति लेनी पड़ेगी। फिलहाल इस असमंजस के चलते करोड़ों रुपये की लागत से बने फ्लैट खाली पड़े हैं और रेलवे की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बन जाने के बाद अब निकाली जा रहीं कमियां

आवास और कार्यालय बनने के बाद जब हैंडओवर की बारी आई तो रेलवे अधिकारी अब इनमें कमियां गिना रहे हैं। इससे रेलवे कर्मचारी किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं। वहीं रेलवे को भी राजस्व की हानि हो रही है, क्योंकि प्रत्येक कर्मचारी को हर महीने करीब 8 से 15 हजार रुपये किराया देना पड़ रहा है।

इनका कहना है

“फ्लैटों के बाहर सर्कुलेटिंग एरिया में अभी कुछ कार्य प्रगतिरत हैं। यह कार्य पूर्ण होते ही वरिष्ठता के आधार पर कर्मचारियों को आवासों का आवंटन किया जाएगा। जहां तक फ्लैटों में फर्नीचर अथवा अलमारियों की व्यवस्था का प्रश्न है, इस संबंध में संबंधित एजेंसी से जानकारी ली जा रही है। मामले की विस्तृत पड़ताल कराई जा रही है और आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।”

- अनिरुद्ध कुमार,मंडल रेल प्रबंधक, झांसी

Similar News