ग्वालियर: सरकारी स्कूल में उड़ान भरता भविष्य, एलईडी से ड्रोन तक बच्चों का हुनर
सरकारी विद्यालयों के बारे में आम धारणा है कि यहां कक्षाएं लग जाएं, यही बहुत है नवाचार होना तो दूर की कौड़ी है. लेकिन इस धारणा को एक सरकारी शिक्षक ने ही बदल दिया है,.ये शिक्षक हैं बृजेश कुमार शुक्ला। उन्होंने सबसे पहले बच्चों को दीपक, मोमबत्ती और मिट्टी के खिलौने बनाने का कौशल सिखाया। इसके बाद विद्यार्थियों से एलईडी बल्ब बनवाए। इसके लिए उन्होंने एक ड्रोन असेंबल करने वाली कंपनी की मदद भी ली।
एलईडी बनाने से शुरू हुआ सफर, अब ड्रोन असेंबल कर रहे हैं विद्यार्थी
बच्चों द्वारा बनाई गई एलईडी को सरकारी विभागों ने खरीदना शुरू किया, जिससे बच्चों को जेब खर्च भी मिलने लगा। यहाँ भी श्री शुक्ला ने विराम नहीं लिया। जब निजी महाविद्यालय और विद्यालयों के प्रबंधन विद्यार्थियों को ड्रोन असेंबल करने और उड़ाने की योजना बना रहे थे, उसी दौरान उन्होंने सरकारी विद्यालय के विद्यार्थियों को पहले ड्रोन उड़ाना और फिर ड्रोन असेंबल करना भी सिखा दिया।
शासकीय विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 के विद्यार्थियों के लिए व्यवसायिक शिक्षा संचालित है इसके अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पात्रनवीसी में आईटी एवं हार्डवेयर ब्रांच की व्यवसायिक शिक्षा दी जाती है। इसी क्रम में विद्यालय के व्यवसायिक नोडल अधिकारी बृजेश कुमार शुक्ला ने ड्रोन प्रशिक्षण दिए जाने का प्रस्ताव डीईओ हरिओम चतुर्वेदी को, प्राचार्य संजय निगम के माध्यम से प्रस्तुत किया।
वाई तकनीक में आत्मनिर्भरता के लिए ड्रोन प्रशिक्षण
प्रस्ताव मंजूर होने के बाद व्योम ड्रोन कंपनी के निदेशक संतोष शर्मा एवं कंपनी के इंजीनियर अभिषेक पांडे और हर्षवर्धन सिंह के सहयोग से ड्रोन प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया। इसके तहत माह में तीन दिन कंपनी के इंजीनियरों द्वारा विद्यार्थियों को ड्रोन का प्रशिक्षण दिया गया। बच्चों की लगन और इंजीनियरों के मार्गदर्शन से दिसंबर माह में विद्यार्थियों ने ड्रोन की असेंबलिंग कर ड्रोन तैयार कर लिया।
इस ड्रोन का प्रदर्शन राष्ट्रीय शैक्षिक कार्यशाला 2025, सूरत (गुजरात) में किया गया। इस कार्यशाला के मुख्य कार्यक्रम में गुजरात सरकार के शिक्षा मंत्री सहित अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे। जिले से बृजेश कुमार शुक्ला (नोडल एवं मास्टर ट्रेनर, व्यवसायिक शिक्षा, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पात्रनवीसी) तथा विद्यालय के छात्र मनु शिवहरे कक्षा 11 और राजा कुशवाहा कक्षा 11 ने सहभागिता की और ड्रोन का प्रदर्शन किया।
कौशल विकास के लिए यह शिक्षा भी दी गई
इस विद्यालय में पूर्व में एलईडी बल्ब, अगरबत्ती, धूपबत्ती, गोबर से बने दीपक, मूर्तियां, मिट्टी के बर्तन एवं सजावटी सामान बनाना भी सिखाया गया था। इसके अंतर्गत 10 विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ 4 से 5 हजार रुपये प्रतिमाह कमा रहे हैं और शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं।
आगे की योजना
वर्तमान में विद्यालय के पास एक ड्रोन है, जबकि दूसरा ड्रोन विद्यार्थी स्वयं तैयार कर रहे हैं। इसके बाद विद्यार्थियों को ड्रोन से दवाओं की मार्केटिंग, कृषि क्षेत्र में कीटनाशकों का छिड़काव, फोटोग्राफी तथा ड्रोन से फूलों की वर्षा जैसे कार्यों में रोजगार दिलाने की योजना है।
प्रदेश सरकार द्वारा विद्यार्थियों के कौशल विकास के लिए योजनाएँ शुरू की गई हैं। स्कूल प्रबंधन ने विचार किया कि वर्तमान में वाई तकनीक ड्रोन से संबंधित है, इसलिए इसी पर फोकस कर विद्यार्थियों को ऐसा कौशल सिखाया जाए, जो उनके करियर में सहायक सिद्ध हो सके।
- बृजेश कुमार शुक्ला,
उच्च माध्यमिक शिक्षक, नोडल प्रभारी, व्यवसायिक शिक्षा, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, पात्रनवीसी