ग्वालियर नगर निगम में संपत्तिकर में बड़ा खेल: दो लाख संपत्तियां बाहर, ईमानदार करदाता ही शिकार
ग्वालियर नगर निगम की आर्थिक रीढ़ मानी जाने वाली संपत्तिकर की हकीकत बेहद चौंकाने वाली है। एक ओर इंदौर और भोपाल जैसे शहर हर साल 180 करोड़ रुपए से अधिक की संपत्तिकर वसूली कर रहे हैं, वहीं ग्वालियर, 3 लाख 10 हजार संपत्तियों के बावजूद, महज 91 करोड़ रुपए पर सिमट कर रह गया है। यह हाल तब है जब वित्तीय वर्ष खत्म होने में सिर्फ ढाई महीने शेष हैं।
सवाल यह उठता है कि क्या शहर में संपत्तियां कम हैं या कर वसूली का सिस्टम जानबूझकर पंगु बना दिया गया है? हकीकत यह है कि निगम सीमा की दो-तिहाई संपत्तियां कर के दायरे से बाहर हैं और ईमानदार करदाताओं से ही हर साल वसूली की जाती है।
25 हजार शासकीय संपत्तियों से नहीं होती वसूली
शहर में 25 हजार संपत्तियों पर राज्य शासन के कार्यालय, बंगले और स्कूल हैं। इनसे संपत्तिकर नहीं लिया जाता। कुछ संपत्तियां शासकीय भूमि पर बनी हैं, जिनसे भी संपत्तिकर वसूली नहीं होती। उदाहरण के तौर पर संजय नगर, कैंसर पहाड़ी, नारायण विहार, विक्की फैक्टरी के सामने, शिवपुरी लिंक रोड आदि शामिल हैं।
दागी अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत
अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत ने न सिर्फ निगम की कमर तोड़ी है, बल्कि ग्वालियर को विकास की दौड़ में भी पीछे धकेल दिया है।शहर में वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए नगर निगम ने 140 करोड़ रुपए का संपत्तिकर वसूली का लक्ष्य तय किया था, लेकिन अब तक केवल 91 करोड़ रुपए ही वसूली हो सकी है। रफ्तार को देखते हुए, पिछले वर्ष के आंकड़े तक पहुंचना फिलहाल निगम के लिए चुनौती बनता नजर आ रहा है।
दरअसल, संपत्तिकर विभाग में ऐसे दागी अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती है, जो ईमानदारी से कर वसूलने के बजाय अपनी जेबें भरते हैं। कई बार इनके घोटाले भी उजागर हुए हैं।सीधी बात यह है कि जब नगर निगम सीमा में 3 लाख 10 हजार संपत्तियां हैं, तो सिर्फ 1 लाख 3 हजार लोगों से ही संपत्तिकर क्यों वसूला जा रहा है? शेष संपत्ति स्वामी बिना संपत्तिकर चुकाए ही नगर निगम द्वारा दी जाने वाली जनसुविधाओं का लाभ ले रहे हैं।
केंद्र की संस्थाओं से नहीं हो रही वसूली
केंद्र शासन की संपत्तियों से नगर निगम सेवा कर वसूलता है। इसमें नारकोटिक्स, एलएनआईपीई, रेलवे, ट्रिपल आईटीएम जैसे संस्थान शामिल हैं। सेना के किसी संस्थान से कोई वसूली नहीं की जाती। रेलवे पर नगर निगम का लगभग 12 करोड़ रुपए से अधिक बकाया है, लेकिन विवाद के कारण वसूली नहीं हो पाई।
फंड की कमी से अटके कार्य
निगम के जनकार्य विभाग के अंतर्गत कायाकल्प फेज 1 और 2, मुख्यमंत्री अधोसंरचना के तहत सीसी व डामर की सड़क निर्माण, नाला निर्माण, सड़क मरम्मत, विद्युत विभाग में सोडियम सप्लाई, विद्युतीकरण, वाटर कूलर, सीएसआर फंड, वर्कशॉप (कार्यशाला) में पार्षदों की मौलिक निधि से आने वाले ट्रैक्टर व ट्रॉली, पीएईआरसी में नलकूप खनन, अमृत ओएनडम, सीवर संधारण, नलकूप संधारण, पेयजल सप्लाई कंपनी का भुगतान, स्वास्थ विभाग में सफाई सहित अन्य कार्य फंड की कमी से अधर में लटके हुए हैं।
संपत्तिकर वसूली में मुख्य कारण
जिम्मेदारों द्वारा निगरानी न करना
कई संपत्तियों में डबल आईडी होना
प्रत्येक दिन केवल 25 घरों का निरीक्षण
प्रचार-प्रसार का अभाव
बकायादारों पर कुर्की आदि कार्रवाई न होना
टीसी और एपीटीओ का समय पर फील्ड में न जाना
धार्मिक संस्थानों की अलग सूची न होना
संपत्तियों का नवीन सर्वेक्षण न कराना
टीसी और एपीटीओ का नामांतरण पर अधिक ध्यान देना
आईडी में मोबाइल नंबर न डालना