आईएएस पूजा सिंघल के पति और सीए को आमने-सामने बैठाकर हो रही पूछताछ

Update: 2022-05-08 11:18 GMT

रांची। झारखंड की खान सचिव पूजा सिंघल के पति अभिषेक झा और सीए सुमन कुमार सिंह से रविवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी पूछताछ कर रहे हैं। ईडी ने पूछताछ के लिए दोनों को कार्यालय बुलाया है। ईडी दोनों से आमने-सामने बैठाकर सवाल-जवाब कर रही है। सीए सुमन कुमार सिंह को ईडी ने पांच दिन की रिमांड पर लिया है। सीए सुमन के घर से ईडी करीब 17 करोड़ रुपये नकजी बरामद की है। इस बरामदगी के बाद से ईडी लगातार पूजा सिंघल और उनके करीबियों पर शिकंजा कस रही है। 

बरामद करोड़ों रुपये के स्रोत के बारे में नहीं बता पाये सुमन कुमार 

ईडी की पूछताछ में सीए सुमन कुमार बरामद करोड़ों रुपये के स्रोत के बारे में नहीं बता पाये थे। इसके बाद शनिवार की शाम उसे गिरफ्तार कर लिया गया। विशेष न्यायाधीश प्रभात कुमार शर्मा की अदालत ने ईडी के आवेदन पर विचार करने के बाद आरोपित को पांच दिनों की रिमांड पर लेने की स्वीकृति दी। साथ ही 12 मई को पेश करने को कहा। ईडी की ओर से विशेष पीपी बीएमपी सिंह ने 10 दिनों के लिए रिमांड की मांग की थी। देर रात ईडी ने सीए सुमन को बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा भेज दिया।

उल्लेखनीय है कि मनरेगा घोटाले को लेकर ईडी ने छह मई से पूजा सिंघल के आवास, उनके पति के पल्स अस्पताल, सीए सुमन कुमार सिंह सहित अन्य कई ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान बड़ी मात्रा में नकदी के साथ कई महत्वपूर्ण दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। दावा किया जा रहा है कि पूजा सिंघल के घर से एक डायरी मिली है। इसमें ब्यूरोक्रेट्स, नेताओं और रसूखदारों के नाम हैं। ट्रांजेक्शन का भी जिक्र है। माना जा रहा है कि इस मामले में पूछताछ के लिए ईडी पूजा सिंघल के साथ-साथ कई और लोगों को तलब कर सकती है।अब तक की जांच में 20 से अधिक शेल कंपनियों का भी पता चला है। इसके जरिए विभिन्न तरीकों से आने वाले पैसे खपाए जा रहे थे। अब इन सभी कंपनियों की सघनता से जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) भी मनरेगा घोटाले की जांच कर सकती है।

खूंटी में लगे आरोप - 

खूंटी में पूजा सिंघल के डीसी रहने के दौरान 18 करोड़ रुपये का मनरेगा घोटाला हुआ था। इसके बाद राजेश शर्मा डीसी बने तो उन्होंने ग्रामीण विकास विभाग को गड़बड़ी की जांच कराने की अनुशंसा की। विभाग ने एक कमेटी बनाकर इसकी जांच कराई तो गड़बड़ी की पुष्टि हुई। वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो ने खूंटी में मनरेगा घोटाले की जांच एसीबी से कराने के आदेश दिए थे लेकिन यह आदेश कभी एसीबी तक पहुंचा ही नहीं।

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