बजट 2026 में MEA के लिए बढ़ा आवंटन, सदमे में चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश, दोस्तों को फायदा
बजट 2026 में MEA आवंटन बढ़ाया गया है। मित्र देशों में अफगानिस्तान-नेपाल-भूटान को फायदा मिला। वहीं, तनाव के चलते बांग्लादेश-मालदीव पर कटौती।
नई दिल्लीः केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार, 1 फरवरी 2026 को संसद में केंद्रीय बजट पेश किया। बजट दस्तावेज़ों से साफ है कि भारत ने विकास परियोजनाओं के लिए अपनी विदेशी सहायता नीति को नए सिरे से रणनीतिक रूप दिया है। आगामी वित्त वर्ष के लिए विदेश मंत्रालय (MEA) के बजट में करीब 1,600 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी करते हुए कुल 22,119 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
इस बजट में भारत की ‘नेबर फर्स्ट’ नीति और क्षेत्रीय संतुलन की प्राथमिकताएं साफ तौर पर झलकती हैं। हालांकि इसमें बांग्लादेश तनाव और मालदीव के लिए असर साफ दिखा। जहां बांग्लादेश और मालदीव के लिए आवंटन में कटौती की गई है, वहीं अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान और श्रीलंका के लिए सहायता बढ़ाकर भारत ने अपनी नई कूटनीतिक दिशा का संकेत दिया है।
पक्के दोस्त के लिए खोला खजाना
अफगानिस्तान के लिए सहायता राशि 50 करोड़ रुपये बढ़ाकर 150 करोड़ रुपये कर दी गई है। रणनीतिक जानकार इसे क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से बड़ा कदम मान रहे हैं। भारत की मानवीय और विकास सहायता काबुल में उसकी मौजूदगी को मजबूत करती है, जो पाकिस्तान की पारंपरिक रणनीति के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकती है।
बांग्लादेश को सख्त संदेश
बांग्लादेश से जुड़े मामलों के लिए बजट घटाकर 60 करोड़ रुपये कर दिया गया है। पिछले साल आवंटित 120 करोड़ रुपये का पूरा उपयोग न हो पाने के कारण यह कटौती की गई। इससे संकेत मिलता है कि ढाका के साथ सहयोग अब सीमित दायरे में रहेगा। मालदीव के लिए भी आवंटन घटाकर 550 करोड़ रुपये किया गया है। पिछले साल के मुकाबले इस बार 50 करोड़ की कमी की गई है।
नेपाल-भूटान की मदद से चीन की बढ़ी चिंता
नेपाल के लिए सहायता बढ़ाकर 800 करोड़ रुपये कर दी गई है, जो पिछले साल से 100 करोड़ रुपये अधिक है। वहीं, भूटान को 2,288 करोड़ रुपये का बड़ा आवंटन मिला है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब चीन इन देशों में निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर के ज़रिए अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। भारत के इस कदम से क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन बदलेगा और चीन की चिंता बढ़ना तय माना जा रहा है।
श्रीलंका को राहत की सांस
बश्रीलंका को राहत की सांस श्रीलंका के लिए भी सहायता 100 करोड़ रुपये बढ़ाकर 400 करोड़ रुपये कर दी गई है। आर्थिक संकट से उबर रहे कोलंबो के लिए यह मदद अहम सहारा साबित होगी। कुल मिलाकर, विदेश मंत्रालय के बजट से यह साफ है कि भारत ने पड़ोस में मानवीय सहयोग, रणनीतिक संतुलन और प्रभावी प्रतिस्पर्धा-तीनों मोर्चों पर एक साथ कदम बढ़ाए हैं।