498A के दुरुपयोग पर कलकत्ता हाईकोर्ट नाराज, कहा - महिलाएं फैला रही कानूनी आतंकवाद

जस्टिस शुभेंदु सामंत ने एक महिला की उसके ससुराल पक्ष के खिलाफ याचिका रद्द करते हुए कहा कि इसे महिलाओं के कल्याण के लिए लाए थे, लेकिन अब इसके झूठे मामले ज्यादा आ रहे हैं।

Update: 2023-08-22 09:41 GMT

कोलकाता। समाज में दहेज और उससे जुड़े अपराधों को रोकने के लिए बनाई गए आईपीसी की धारा 498 A के बढ़ते दुरूपयोग पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। एक मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए इसकी तुलना आतंकवाद से कर दी।  

जस्टिस शुभेंदु सामंत ने एक महिला की उसके ससुराल पक्ष के खिलाफ याचिका रद्द करते हुए कहा कि इसे महिलाओं के कल्याण के लिए लाए थे, लेकिन अब इसके झूठे मामले ज्यादा आ रहे हैं। इसका गलत इस्तेमाल हो रहा है।उन्होंने कहा "धारा 498A को महिलाओं के भलाई के लिए लाया गया था. लेकिन इसका इस्तेमाल अब झूठे मामले दर्ज करने में हो रहा है. समाज से दहेज खत्म करने के लिए धारा 498A लाया गया था. लेकिन कई मामलों में देखा गया है, इस कानून का गलत इस्तेमाल कर कानूनी आतंकवाद छेड़ रखा है।" 

कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया है धारा 498ए में शामिल क्रूरता को सिर्फ पत्नी की तरफ से साबित नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा, 'कानून शिकायतकर्ता को आपराधिक शिकायत दर्ज कराने की अनुमति देता है, लेकिन इसे ठोस सबूत के साथ साबित भी किया जाना चाहिए।'

ये है मामला- 

दरअसल, एक शख्स और उसके परिजनों ने पत्नी द्वारा लगाए गए दहेज़ के प्रकरण को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट में दाखिल याचिका के अनुसार, पत्नी ने याचिकाकर्ता पति के खिलाफ अक्टूबर 2017 में मानसिक और शारीरिक क्रूरता की पहली बार शिकायत दर्ज कराई थी।इसके बाद दिसंबर 2017 में उसने पति के परिवार के सदस्यों पर भी शारीरिक और मानसिक यातना देने के आरोप लगाए थे।इसके बाद पुलिस ने कुछ गवाहों और पड़ोसियों के बयान दर्ज किए, लेकिन अदालत ने इन्हें काफी नहीं माना।


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