31 जुलाई 2026 तक इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करना जरूरी है। जानिए ITR फाइल करते समय किन 10 महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना चाहिए और गलती होने पर क्या नुकसान हो सकता है।
बिजनेस डेस्क | वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सामान्य करदाताओं के लिए रिटर्न फाइल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 निर्धारित है। वहीं कुछ व्यवसायिक और पेशेवर श्रेणी के करदाताओं के लिए यह समयसीमा 31 अगस्त 2026 तक है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर और सही जानकारी के साथ ITR दाखिल करना बेहद जरूरी है, क्योंकि आयकर विभाग अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा एनालिटिक्स और विभिन्न वित्तीय डेटाबेस के माध्यम से करदाताओं की आय और लेन-देन का मिलान करता है।
किसे भरना चाहिए ITR?
यदि आपकी वार्षिक आय कर योग्य सीमा से अधिक है, तो ITR दाखिल करना आवश्यक है। इसके अलावा कई मामलों में टैक्सेबल आय न होने पर भी रिटर्न भरना फायदेमंद रहता है, जैसे
- बैंक लोन या वीजा आवेदन के लिए
- टैक्स रिफंड प्राप्त करने के लिए
- वित्तीय रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए
- भविष्य के निवेश और ऋण प्रक्रियाओं में सुविधा के लिए
आयकर विभाग की नजर हर वित्तीय लेन-देन पर
अब विभाग बैंक खातों, टीडीएस, शेयर बाजार निवेश, म्यूचुअल फंड, संपत्ति खरीद-बिक्री, विदेशी निवेश और विदेश यात्राओं तक की जानकारी विभिन्न स्रोतों से प्राप्त कर ITR में दी गई जानकारी से मिलान करता है। ऐसे में कोई भी आय छिपाना या गलत जानकारी देना भविष्य में नोटिस, अतिरिक्त टैक्स, ब्याज और पेनाल्टी का कारण बन सकता है।
ITR भरते समय इन 10 बातों का रखें विशेष ध्यान
1. केवल फॉर्म-16 पर निर्भर न रहें
फॉर्म-16 में सिर्फ वेतन और कटे हुए TDS की जानकारी होती है। यदि आपको ब्याज, किराया, डिविडेंड, फ्रीलांस आय या अन्य स्रोतों से कमाई हुई है तो उसे भी शामिल करना जरूरी है।
2. सही ITR फॉर्म का चयन करें
गलत फॉर्म चुनने पर रिटर्न डिफेक्टिव माना जा सकता है।
| ITR Form |
किसके लिए |
| ITR-1 |
वेतन, पेंशन और सामान्य ब्याज आय |
| ITR-2 |
कैपिटल गेन, विदेशी संपत्ति या एक से अधिक मकान |
| ITR-3 |
व्यवसाय, फ्रीलांसिंग, ट्रेडिंग और F&O |
| ITR-4 |
छोटे व्यवसायी और प्रोफेशनल्स |
3. AIS, TIS और Form 26AS का मिलान करें
रिटर्न दाखिल करने से पहले सभी वित्तीय दस्तावेजों का मिलान करें ताकि किसी भी प्रकार की विसंगति से बचा जा सके।
4. नौकरी बदली है तो दोनों कंपनियों की आय जोड़ें
वित्त वर्ष के दौरान जॉब बदलने पर पुराने और नए दोनों नियोक्ताओं से प्राप्त वेतन को शामिल करना आवश्यक है।
5. बैंक खाते की जानकारी सही दें
रिफंड प्राप्त करने वाले बैंक खाते का अकाउंट नंबर और IFSC कोड सही दर्ज करें, अन्यथा रिफंड में देरी हो सकती है।
6. ब्याज आय छिपाने की गलती न करें
FD, RD, सेविंग अकाउंट या बॉन्ड से मिलने वाले ब्याज को भी आय में शामिल करें। यह जानकारी विभाग तक पहले से पहुंच जाती है।
7. शेयर, म्यूचुअल फंड और प्रॉपर्टी ट्रांजेक्शन घोषित करें
शेयर, म्यूचुअल फंड या संपत्ति बेचने पर हुए लाभ और हानि दोनों का विवरण देना जरूरी है। नुकसान दिखाने से भविष्य में टैक्स बचत का लाभ मिल सकता है।
8. कटौतियों का दावा प्रमाण के साथ करें
धारा 80C, 80D, NPS और होम लोन ब्याज जैसी कटौतियों के लिए संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखें।
9. विदेशी निवेश और आय की जानकारी दें
विदेशी शेयर, बैंक खाते, ETF या अन्य विदेशी परिसंपत्तियों का पूरा विवरण देना जरूरी है, विशेषकर निवासी करदाताओं के लिए।
10. ई-वेरिफिकेशन करना न भूलें
रिटर्न फाइल करने के बाद आधार OTP, नेट बैंकिंग, डिमैट अकाउंट या डिजिटल सिग्नेचर के माध्यम से ई-वेरिफिकेशन जरूर करें। इसके बिना रिटर्न अधूरा माना जा सकता है।
31 जुलाई की समयसीमा न चूकें
यदि आप 31 जुलाई तक रिटर्न दाखिल नहीं कर पाते हैं, तो 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न दाखिल किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए निर्धारित जुर्माना और अन्य शुल्क चुकाने पड़ सकते हैं। कर विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम समय की भीड़ और तकनीकी समस्याओं से बचने के लिए करदाताओं को समय रहते ITR दाखिल कर देना चाहिए।