वीएचपी ने कॉर्पोरेट सेक्टर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर उद्योग संगठनों को पत्र लिखा, टीसीएस मामले का हवाला देते हुए सख्त कदम उठाने की मांग की।
टीसीएस जैसे मामलों से आहत विहिप ने भेजा फिक्की जैसे प्रमुख व्यावसायिक संघों कोफा विशेष प्रतिनिधि विश्व हिंदू परिषद के महासचिव बजरंग बागड़ा ने व्यापार और उद्योग से जुड़े शीर्ष निकायों से कॉर्पोरेट जगत में काम कर रही महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।
स्वदेश के साथ अपनी विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि विश्व हिंदू परिषद ने फिक्की, सीआईआई, एसोचैम, आईसीसी, बीसीसी, पीएचडीसीआईआई, नैसकॉम जैसे संगठनों को पत्र लिख कर यह अपील की कि वे अपने संस्थानों में कामकाज के माहौल पर विशेष ध्यान दें और वहां काम कर रही महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें। उन्होंने कॉर्पोरेट जगत से अनुरोध किया है कि वह महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्यस्थल का वातावरण बनाकर राष्ट्र को प्रगति की नई ऊंचाइयों तक ले जाए।
विश्व हिंदू परिषद के अंतर्राष्ट्रीय महासचिव बागड़ा ने हाल ही में नासिक स्थित टीसीएस में हुए घटनाक्रम का हवाला देते हुए उद्योग संगठनों से महिलाओं की सुरक्षा के मामले में तुरंत उचित कार्रवाई करने की अपील की है। उन्होंने चेताया कि अगर कॉर्पोरेट जगत की नीतियों और उनके क्रियान्वयन में सुधारात्मक कदमों की कमी पाई गई, तो वीएचपी सभी उपलब्ध संवैधानिक उपायों को अपनाने के लिए विवश होगी।
वीएचपी पूरी निष्पक्षता के साथ ऐसे मामलों पर पैनी नजर रखेगी कि क्या कदम उठाए गए हैं या नहीं उठाए गए हैं। इस सवाल पर कि विश्व हिन्दू परिषद इसे कितना बड़ा खतरा मानता है और इस दिशा में क्या कदम उठा रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि वीएचपी भारत में व्यापार और उद्योग के नई दिल्ली शीर्ष निकायों को कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा जैसे अत्यंत संवेदनशील मामले पर ध्यान देकर उचित कदम उठाएगी।
बागड़ा ने उद्योग और व्यापार संगठनों का ध्यान टीसीएस में चल रहे धर्म परिवर्तन के बड़े षड्यंत्र की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि 'शिकारी' की भूमिका में एक विशेष धार्मिक समुदाय से जुड़े कुछ पुरुष कर्मचारियों साजिशों के साथ दूसरे समुदाय की महिला कर्मचारियों के साथ साथ ही पुरुष कर्मचारियों को भी अपना निशाना बनाया जा रहा है।
बजरंग बागड़ा ने कहा कि ये किसी व्यक्तिगत कट्टरपंथी द्वारा किए गए अपराधों के अलग थलग मामले नहीं हैं, बल्कि सुनियोजित, वित्तपोषित और पेशेवर ढंग से योजनाबद्ध तरीके से सामूहिक षड्यंत्र के मामले हैं। उन्होंने बताया कि टीसीएस, नासिक मामले के शुरुआती साक्ष्य आरोपी कट्टरपंथियों और आतंकवादियों के सांठगांठ की तरफ़ भी इशारा कर रहे हैं। विदेशी फंडिंग की संलिप्तता की ओर संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने बताया कि जांच से पता चलता है कि टीसीएस के कार्मिक अधिकारी इन अपराधों में शामिल गिरोहों को आश्रय देते थे। वे सुनिश्चित करते थे कि मुश्किल समुदाय के पुरुष 'शिकारियों' की भर्ती और नियुक्ति ऐसी जगहों पर हो, जहां वे महिला कर्मचारियों को प्रभावित कर उनका शोषण कर सकें।
यह शोषण केवल उत्पीड़न तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसमें जबरन बीफ खिलाना, बलात्कार, ब्लैकमेल और अंततः धर्म-परिवर्तन कराना भी शामिल था। विहिप के महासचिव ने अपनी बातचीत में कहा कि टीसीएस का वरिष्ठ प्रबंधन महिलाओं के लिए सुरक्षित कार्य स्थल उपलब्ध कराने की जिम्मेदारियों को निभाने में पूरी तरह विफल रहा।
प्रबंधन अपनी घोर लापरवाही और कुप्रबंधन के माध्यम से इन अपराधों में मौन भागीदार बना रहा। स्वदेश के माध्यम से उन्होंने उद्योग संगठनों से अपील की कि वे एक विशेष धार्मिक समुदाय से संबंधित उम्मीदवारों की भर्ती और नियुक्ति के समय बहुत सतर्कता बरतें। बागड़ा ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद चाहती है कि टीसीएस में हुए निंदनीय घटनाक्रम को ध्यान में रखते हुए कॉर्पोरेट जगत की सभी कंपनियां भर्तियों की गंभीर समीक्षा करते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाएं।
वीएचपी के अंतरराष्ट्रीय महासचिव बजरंग बागड़ा ने स्पष्ट किया कि किसी विशेष समुदाय लोग द्वारा जिस तरह का पैटर्न और व्यापकता सामने आई है, ऐसे में निश्चित रूप से अतिरिक्त सावधानी और सतर्कता बरतने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कार्य प्रणाली से लेकर नियुक्ति तक महिला कर्मचारियों के शोषण को रोकने के लिए सतत निगरानी बहुत आवश्यक है।
केवल अपने आर्थिक लाभ को साधने की होड़ में अगर कॉर्पोरेट जगत की ओर से कोई भी ढुलमुल या लापरवाही भरा रवैया जारी रहता है, तो यह न केवल समाज और राष्ट्र के लिए अहित होगा, बल्कि इससे समाज का उन पर से विश्वास और आस्था डगमगाना भी निश्चित है। बजरंग बागड़ा ने यह भी कहा कि विश्व हिंदू परिषद राष्ट्र, संस्कृक्ति और समुदाय के हितों की रक्षा के लिए कटिबद्ध हैं। कॉर्पोरेट जगत की ऐसी गंभीर असावधानी, संलिप्तता और चूकों की अनदेखी नहीं की जा सकता।