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मोदीजी का नेहरू से लंबा कार्यकाल

विकसित भारत-2047 के संकल्प से समृद्ध मोदीजी का कार्यकाल

नरेंद्र मोदी ने जवाहरलाल नेहरू के कार्यकाल के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। उनका प्रत्येक दिन विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने में समर्पित रहा है।


विकसित भारत-2047 के संकल्प से समृद्ध मोदीजी का कार्यकाल

नरेंद्र सिंह तोमर

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में 4,399 दिन पूरे किए। इस प्रकार उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के 4,398 दिनों के कार्यकाल का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल का प्रत्येक दिन विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने की दिशा में समर्पित रहा है। यह विकास केवल भौतिक प्रगति का प्रतीक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना, आत्मविश्वास और वैचारिक समृद्धि का भी द्योतक है।

आज हम गर्व से कह सकते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने अपनी उस सांस्कृतिक चेतना को पुनः प्रतिष्ठित किया है, जो कभी उसकी वैश्विक पहचान थी। एक ओर काशी विश्वनाथ धाम का पुनर्विकास, भव्य राम मंदिर का निर्माण और केदारनाथ धाम का पुनरुद्धार है, तो दूसरी ओर वंदे भारत ट्रेनें, आधुनिक एक्सप्रेस-वे और विश्वस्तरीय आधारभूत संरचना का विस्तार है। यह ‘विकास भी, विरासत भी’ की अवधारणा का सशक्त उदाहरण है, जिसने आधुनिकता और भारतीयता के बीच संतुलन स्थापित किया है।जब दो प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल की अवधि की तुलना होती है, तब उनके कार्यों और उपलब्धियों पर चर्चा स्वाभाविक है। पंडित जवाहरलाल नेहरू को स्वतंत्र भारत का शिल्पकार कहा जाता है, जबकि प्रधानमंत्री मोदी विकसित भारत-2047 के संकल्प का नेतृत्व कर रहे हैं। दोनों ने अपने-अपने समय की चुनौतियों का सामना किया, किंतु आज का भारत कहीं अधिक जटिल परिस्थितियों से गुजर रहा है। डिजिटल क्रांति, वैश्विक प्रतिस्पर्धा, आर्थिक परिवर्तन और सामरिक चुनौतियाँ आज के शासन को पहले की अपेक्षा अधिक कठिन बनाती हैं।

नेहरू के समय भारत की आबादी लगभग 34 करोड़ थी, जबकि आज यह चार गुना से अधिक हो चुकी है। उस समय देश की जीडीपी लगभग 2.7 लाख करोड़ रुपये थी और औसत विकास दर 3.5 से 4 प्रतिशत के बीच रहती थी। वहीं, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की अर्थव्यवस्था उल्लेखनीय रूप से विस्तृत हुई है। वर्ष 2014-15 में देश की नॉमिनल जीडीपी 106.57 लाख करोड़ रुपये थी, जो 2024-25 तक बढ़कर 331.03 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई। वर्ष 2026 तक भारत की जीडीपी लगभग 357 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुँचने का अनुमान है। यह परिवर्तन भारत को वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनने की दिशा में अग्रसर करता है।यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल में भारत ने कोविड-19 महामारी, वैश्विक मुद्रास्फीति, भू-राजनीतिक संघर्षों और वैश्विक सप्लाई चेन में आई गंभीर बाधाओं जैसी अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना किया। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहा।

स्वतंत्रता के शुरुआती दशकों में भारत आयात पर अत्यधिक निर्भर था और विदेशी मुद्रा का संकट गंभीर चुनौती था। आज स्थिति बदल चुकी है। बीते दशक में भारत की वैश्विक व्यापारिक हिस्सेदारी लगातार मजबूत हुई है। वर्ष 2013-14 में देश का कुल निर्यात 468 अरब अमेरिकी डॉलर था, जो 2024-25 तक बढ़कर लगभग 825 अरब अमेरिकी डॉलर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच गया।स्वतंत्रता के समय भारत गरीबी, अशिक्षा, खाद्यान्न संकट और राष्ट्र-निर्माण जैसी बुनियादी चुनौतियों से जूझ रहा था। आज देश की प्राथमिकताएँ बदल चुकी हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी), उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत अभियान तथा महिला सशक्तीकरण जैसी योजनाओं के माध्यम से प्रशासनिक दक्षता और सुशासन का नया मॉडल प्रस्तुत किया है।

स्टार्टअप, डिजिटल अर्थव्यवस्था, विनिर्माण प्रोत्साहन और नवाचार आधारित विकास आज नए भारत की पहचान बन चुके हैं। यूपीआई, जन-धन और आधार के माध्यम से देश के अंतिम व्यक्ति तक वित्तीय समावेशन सुनिश्चित किया गया है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत पाँच लाख रुपये तक का निःशुल्क उपचार करोड़ों परिवारों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का आधार बना है।आज देश में 138 करोड़ से अधिक लोगों के पास आधार पहचान है। प्रधानमंत्री जन-धन योजना के अंतर्गत 58 करोड़ से अधिक बैंक खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें तीन लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है। इनमें 32 करोड़ से अधिक खाते महिलाओं के हैं, जिनमें अधिकांश ग्रामीण एवं अर्धशहरी क्षेत्रों की महिलाएँ हैं। आधार, मोबाइल और बैंक खाते के इस त्रिवेणी मॉडल ने प्रत्यक्ष लाभ अंतरण को पारदर्शी और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाया है, जिससे सरकारी सहायता सीधे पात्र लाभार्थियों तक पहुँच रही है।

दोनों प्रधानमंत्रियों के लंबे कार्यकाल को देखने पर स्पष्ट होता है कि यह केवल दो व्यक्तित्वों की तुलना नहीं, बल्कि स्वतंत्रता के बाद के भारत की विकास-यात्रा का प्रतिबिंब है। मेरा मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 4,399 दिनों के कार्यकाल में देश ने केवल शासन-प्रशासन में परिवर्तन नहीं देखा, बल्कि विकास के मानकों पर व्यापक और संरचनात्मक बदलाव का अनुभव किया है।प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केवल योजनाओं की घोषणा नहीं हुई, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन, पारदर्शिता, जवाबदेही और अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुँचाने पर विशेष बल दिया गया। यही कारण है कि आज भारत केवल विकास की चर्चा नहीं करता, बल्कि उसे धरातल पर उतारने की क्षमता भी प्रदर्शित करता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत-2047 का जो लक्ष्य देश के सामने रखा है, वह केवल एक संकल्प नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और वैश्विक नेतृत्व की आकांक्षा रखने वाले भारत की दिशा निर्धारित करने वाला राष्ट्रीय अभियान है। यह हम सभी का सौभाग्य है कि हमें ऐसा नेतृत्व प्राप्त हुआ है और हम विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दे पा रहे हैं।

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