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यूपी भाजपा की नई टीम में OBC दांव मजबूत, ब्राह्मण-ठाकुर प्रतिनिधित्व में आई कमी

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने यूपी में नई संगठनात्मक टीम घोषित कर दी है। नई सूची में OBC चेहरों की हिस्सेदारी बढ़ी है, जबकि ब्राह्मण और ठाकुर प्रतिनिधित्व में कमी देखने को मिली है।


यूपी भाजपा की नई टीम में obc दांव मजबूत ब्राह्मण-ठाकुर प्रतिनिधित्व में आई कमी

UP News |

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच भाजपा ने अपने नए संगठनात्मक ढांचे का ऐलान कर दिया है। नई टीम सिर्फ पदाधिकारियों की सूची नहीं है, बल्कि आने वाले चुनावों के लिए पार्टी की सामाजिक और राजनीतिक रणनीति का संकेत भी देती है। सबसे बड़ा बदलाव जातीय प्रतिनिधित्व के संतुलन में दिखाई देता है, जहां पिछड़ा वर्ग पहले से ज्यादा मजबूत होकर उभरा है।

64 पदाधिकारियों वाली नई टीम में प्रदेश कार्यकारिणी के 52 सदस्य शामिल हैं। इस बदलाव के साथ पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आगामी चुनावों में सामाजिक समीकरणों को साधने पर विशेष फोकस रहने वाला है।

OBC पर बढ़ा भरोसा

नई कार्यकारिणी में पिछड़ा वर्ग के नेताओं की संख्या 16 से बढ़कर 25 हो गई है। यह बदलाव भाजपा की उस रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें गैर-यादव पिछड़ा वोट बैंक को और मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में OBC वर्ग निर्णायक भूमिका निभाता है, इसलिए संगठन में उसकी हिस्सेदारी बढ़ाना एक सोचा-समझा कदम है।

सवर्ण प्रतिनिधित्व में हल्का बदलाव

नई टीम में सामान्य वर्ग के कई चेहरे बने हुए हैं, लेकिन ब्राह्मण और ठाकुर समुदाय की हिस्सेदारी में मामूली कमी दर्ज की गई है। ठाकुर नेताओं की संख्या सात से घटकर छह और ब्राह्मण नेताओं की संख्या आठ से घटकर सात हो गई है। हालांकि पार्टी ने भूमिहार, वैश्य और अन्य सवर्ण समुदायों को भी प्रतिनिधित्व देकर संतुलन साधने की कोशिश की है।

नीरज सिंह की एंट्री ने खींचा ध्यान

नई सूची में सबसे ज्यादा चर्चा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के छोटे बेटे नीरज सिंह की एंट्री को लेकर है। उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहने वाले पंकज सिंह की जगह अब नीरज सिंह को नई जिम्मेदारी दी गई है। इसे भाजपा की नई पीढ़ी के नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

छह नाम जिन्होंने राजनीतिक गलियारों में चर्चा बढ़ाई

नई टीम में कुछ ऐसे चेहरे भी शामिल हुए हैं जिनकी नियुक्ति ने राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है। सपा से अलग हुईं पूजा पाल को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है। युवा मोर्चा की कमान रोहित मिश्रा को मिली है। महिला मोर्चा की जिम्मेदारी सरोज कुशवाहा को सौंपी गई है। वहीं कृष्ण बिहारी राय, अभिजात मिश्रा और अन्य नेताओं की नई भूमिकाओं को भी संगठनात्मक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

पुरानी टीम से बड़ा बदलाव

प्रदेश कार्यकारिणी में इस बार केवल सात चेहरे ही दोबारा जगह बना सके हैं। उपाध्यक्ष, महामंत्री और प्रदेश मंत्री जैसे अहम पदों पर बड़ी संख्या में नए नेताओं को मौका दिया गया है। इससे साफ है कि पार्टी ने आगामी चुनावों से पहले संगठन में नई ऊर्जा और नए समीकरणों को प्राथमिकता दी है।

सभी क्षेत्रीय अध्यक्ष बदले गए

भाजपा ने छहों क्षेत्रीय अध्यक्षों को बदलकर संगठन में व्यापक फेरबदल किया है। इसके साथ ही कई क्षेत्रीय नेताओं को प्रमोशन देकर प्रदेश स्तर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह कदम केवल पद परिवर्तन नहीं माना जा रहा, बल्कि क्षेत्रीय स्तर पर नए नेतृत्व को आगे लाने की रणनीति का हिस्सा भी है।

2027 की तैयारी का संकेत

राजनीतिक दृष्टि से यह टीम बेहद अहम मानी जा रही है क्योंकि 2027 विधानसभा चुनाव तक संगठन की पूरी जिम्मेदारी इसी नेतृत्व के कंधों पर होगी। सदस्यता अभियान से लेकर बूथ प्रबंधन, जनसंपर्क कार्यक्रम और चुनावी रणनीति तक सभी मोर्चों की कमान अब इसी टीम के पास रहेगी। ऐसे में नई सूची को भाजपा के आगामी चुनावी रोडमैप की शुरुआती झलक माना जा रहा है।

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