उज्जैन में जीरो शैडो डे पर सूर्य की विशेष स्थिति के कारण कुछ समय के लिए लोगों और वस्तुओं की परछाइयां गायब हो गईं।
दुर्लभ दृश्य देखने बड़ी संख्या में जंतर-मंतर वेधशाला पहुंचे लोग
रविवार को उज्जैन में एक दुर्लभ और रोमांचक खगोलीय घटना देखने को मिली, जिसने विद्यार्थियों, विज्ञान प्रेमियों और आम नागरिकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। वर्ष के सबसे लंबे दिन के अवसर पर दोपहर के समय कुछ मिनटों के लिए लोगों और खड़ी वस्तुओं की परछाइयां लगभग गायब होती दिखाई दीं। विज्ञान की भाषा में इस विशेष घटना को 'जीरो शैडो डे' कहा जाता है।
दोपहर 12 बजकर 28 मिनट पर दिखा अनोखा दृश्य
रविवार को दोपहर लगभग 12 बजकर 28 मिनट पर सूर्य की स्थिति ऐसी बनी, जब यह घटना अपने चरम पर पहुंची। उस समय लोगों ने देखा कि खंभों, डंडों और अन्य सीधी खड़ी वस्तुओं की छाया लगभग नजर नहीं आ रही थी। कई लोगों ने इस अद्भुत क्षण को अपने कैमरों में भी कैद किया।उज्जैन की भौगोलिक स्थिति इस घटना को विशेष बनाती है। यह शहर कर्क रेखा के निकट स्थित है, इसलिए यहां वर्ष के कुछ विशेष दिनों में सूर्य की किरणें लगभग सीधे कोण पर पड़ती हैं। इसी कारण यहां जीरो शैडो डे जैसी घटनाओं का अवलोकन अपेक्षाकृत स्पष्ट रूप से किया जा सकता है। विद्यार्थियों ने भी इस अवसर का लाभ उठाते हुए खगोलीय तथ्यों को समझने में रुचि दिखाई।
क्यों गायब हो जाती है परछाई?
यह घटना तब होती है जब सूर्य आकाश में ऐसी स्थिति में पहुंच जाता है कि उसकी किरणें किसी स्थान पर लगभग सीधी या लंबवत पड़ती हैं। उस समय वस्तुओं की छाया उनके ठीक नीचे सिमट जाती है, जिसके कारण वह सामान्य रूप से दिखाई नहीं देती। यही कारण है कि कुछ क्षणों के लिए ऐसा प्रतीत होता है मानो परछाइयां गायब हो गई हों।इस दुर्लभ दृश्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उज्जैन की जंतर-मंतर वेधशाला पहुंचे।
साल का सबसे लंबा दिन और दक्षिणायन की शुरुआत
खगोल विज्ञान के अनुसार यह दिन वर्ष का सबसे लंबा दिन माना जाता है। उज्जैन में इस दिन 13 घंटे 24 मिनट तक सूर्य का प्रकाश रहा, जबकि रात की अवधि करीब 10 घंटे 26 मिनट दर्ज की गई।यह अंतर दर्शाता है कि सूर्य इस समय उत्तरी दिशा में अपने सर्वोच्च बिंदु पर होता है। अब सूर्य की आभासी स्थिति धीरे-धीरे दक्षिण की ओर बढ़ने लगेगी। इसे दक्षिणायन की शुरुआत माना जाता है। आने वाले दिनों में दिन की अवधि कम होती जाएगी और रातें लंबी होने लगेंगी। सितंबर के अंतिम सप्ताह में ऐसी स्थिति बनेगी, जब दिन और रात लगभग बराबर होंगे।
विज्ञान और प्रकृति का अद्भुत संगम
जंतर-मंतर वेधशाला के विशेषज्ञों ने इस घटना के पीछे के वैज्ञानिक कारणों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है। इसी झुकाव के कारण वर्ष भर सूर्य की स्थिति बदलती रहती है और ऋतुओं का निर्माण होता है।जब सूर्य उत्तर दिशा में अपनी अधिकतम स्थिति पर पहुंचता है, तब उत्तरी गोलार्ध में दिन लंबे और रातें छोटी हो जाती हैं। इसी के परिणामस्वरूप कुछ स्थानों पर जीरो शैडो डे जैसी स्थिति बनती है।
जंतर-मंतर बना आकर्षण का केंद्र
उज्जैन की ऐतिहासिक जंतर-मंतर वेधशाला लंबे समय से खगोलीय घटनाओं के अध्ययन का प्रमुख केंद्र रही है। यहां समय-समय पर आयोजित होने वाली वैज्ञानिक गतिविधियां विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को ब्रह्मांड की जटिलताओं को समझने का अवसर देती हैं।जीरो शैडो डे का यह आयोजन केवल एक खगोलीय घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का भी प्रभावी माध्यम बना।