मध्य प्रदेश में यूजी-पीजी प्रवेश प्रक्रिया के तहत 1.29 लाख छात्रों को कॉलेज सीटें आवंटित हुईं। CLC राउंड शुरू होने के साथ एडमिशन की अंतिम प्रक्रिया तेज हो गई है, जबकि इंजीनियरिंग कॉलेजों में फीस कटौती
भोपाल। कॉलेजों में सीटों की अंतिम तस्वीर अब लगभग साफ होती दिख रही है, लेकिन असली दबाव उन हजारों छात्रों पर है जो अगले कुछ दिनों में अपने भविष्य का फैसला तय करेंगे। कहीं फीस जमा करने की डेडलाइन नजदीक है तो कहीं कॉलेज बदलने का आखिरी मौका। इसी बीच पूरी प्रवेश प्रक्रिया अब अपने निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है।
उच्च शिक्षा विभाग की कॉलेज लेवल काउंसलिंग यानी CLC राउंड में सीट आवंटन जारी होते ही प्रदेश के शासकीय और निजी महाविद्यालयों में दाखिले की अंतिम प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस चरण में स्नातक और स्नातकोत्तर मिलाकर 1 लाख 29 हजार 265 विद्यार्थियों को सीटें मिली हैं, जिसमें स्नातक वर्ग की संख्या सबसे अधिक है।
CLC राउंड से बढ़ी प्रवेश रफ्तार
इस चरण में प्रदेशभर के शासकीय और अशासकीय कॉलेजों में खाली सीटों के आधार पर 1 लाख 29 हजार 265 विद्यार्थियों को आवंटन किया गया है। इनमें 94 हजार 703 स्नातक और 34 हजार 562 स्नातकोत्तर विद्यार्थी शामिल हैं, जिससे स्पष्ट है कि इस बार UG स्तर पर मांग ज्यादा रही है और सीटों का दबाव भी वहीं केंद्रित रहा है।
फीस जमा करने की अंतिम समयसीमा
उच्च शिक्षा विभाग ने साफ निर्देश दिए हैं कि आवंटित सीटों पर प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए 30 जून तक शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा। तय समय पर फीस जमा नहीं करने की स्थिति में सीट स्वतः प्रभावित हो सकती है, जिससे कई छात्रों को अपनी पसंद के कॉलेज से हाथ धोना पड़ सकता है और अंतिम समय में विकल्प सीमित हो जाएंगे।
ई प्रवेश पोर्टल पर नजर जरूरी
विभाग ने छात्रों को लगातार ई-प्रवेश पोर्टल पर अपडेट देखने की सलाह दी है ताकि दस्तावेज सत्यापन और अन्य प्रक्रियाओं में कोई गलती न हो। प्रशासन का मानना है कि डिजिटल प्रक्रिया में छोटी चूक भी सीट गंवाने की वजह बन सकती है, इसलिए हर अपडेट पर नजर रखना अब जरूरी हो गया है।
बीएड एमएड में अलग काउंसलिंग चरण
बीएड और एमएड पाठ्यक्रमों के लिए काउंसलिंग का दूसरा चरण भी शुरू हो चुका है। रजिस्ट्रेशन और चॉइस फिलिंग के बाद 25 जून को मेरिट सूची जारी होगी और 29 जून को सीट आवंटन किया जाएगा। इससे शिक्षा क्षेत्र में प्रवेश चाहने वाले छात्रों के लिए एक अलग निर्णायक चरण तैयार हो गया है।
निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में फीस दबाव
दूसरी ओर निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सीट भरने की चुनौती और आर्थिक दबाव ने फीस संरचना पर बहस तेज कर दी है। कई कॉलेजों ने शुल्क विनियामक समिति को न्यूनतम शिक्षण शुल्क 35 हजार रुपये सालाना करने का प्रस्ताव भेजा है, जिसे मंजूरी मिली तो पूरे तकनीकी शिक्षा ढांचे पर असर पड़ेगा और निजी कॉलेजों की स्थिति बदल सकती है।
एसोसिएशन ऑफ टेक्निकल प्रोफेशनल इंस्टीट्यूशंस मध्यप्रदेश के उपाध्यक्ष डॉ. अजीत सिंह पटेल का कहना है कि अन्य राज्यों की तुलना में यहां फीस कम है, लेकिन सीट भरने की समस्या भी बनी हुई है। वहीं शुल्क विनियामक समिति के सचिव डॉ. अनिल शिवानी के अनुसार कॉलेजों के प्रस्तावों की जांच के बाद ही अंतिम फीस तय की जाएगी।
इसी बीच लगातार घटती प्रवेश दर और बंद होते संस्थानों की स्थिति ने यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में निजी इंजीनियरिंग शिक्षा मॉडल में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं और इसका असर छात्रों की पसंद और कॉलेज सिस्टम दोनों पर पड़ेगा।