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शिक्षकों की समस्या

शिक्षकों के लिए आफत बनी स्कूल शिक्षा विभाग की स्वैच्छिक स्थानांतरण नीति

मध्य प्रदेश में शिक्षकों की ट्रांसफर प्रक्रिया में विवाह प्रमाण-पत्र की अनिवार्यता और पोर्टल की तकनीकी खामियों से बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है।


शिक्षकों के लिए आफत बनी स्कूल शिक्षा विभाग की स्वैच्छिक स्थानांतरण नीति

पोर्टल की खामी: पति-पत्नी से मांगा जा रहा 20-25 साल पुराना विवाह प्रमाण-पत्र

मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग की स्वैच्छिक स्थानांतरण (ट्रांसफर) प्रक्रिया के लिए आवेदन का आज अंतिम दिन है, लेकिन पोर्टल की तकनीकी खामियों के चलते यह प्रक्रिया हजारों शिक्षकों के लिए बड़ी परेशानी बन गई है। पोर्टल में मौजूद तकनीकी समस्याओं और विभाग द्वारा निर्धारित नए दस्तावेज संबंधी नियमों के कारण प्रदेशभर के शिक्षक आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।

सबसे अधिक परेशानी पति-पत्नी नीति के तहत स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षकों को हो रही है। उनसे 20 से 25 वर्ष पुराने विवाह पंजीयन प्रमाण-पत्र की अनिवार्य मांग की जा रही है। उधर, शासकीय शिक्षक संगठन ने इस नियम का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि इस अव्यावहारिक शर्त के कारण कई पात्र शिक्षक भी स्थानांतरण प्रक्रिया से वंचित हो रहे हैं।शिक्षक दंपत्ति रामप्रकाश सिंह और उनकी पत्नी पति-पत्नी नीति के आधार पर एक ही स्थान पर तबादला चाहते हैं, लेकिन पोर्टल पर आवेदन करते समय विवाह प्रमाण-पत्र अनिवार्य रूप से मांगा जा रहा है। उनका कहना है कि उनकी सर्विस बुक में पति-पत्नी दोनों की पूरी जानकारी दर्ज है, फिर अलग से विवाह प्रमाण-पत्र मांगने का औचित्य क्या है?उन्होंने कहा, “हमारी शादी को 25 वर्ष हो चुके हैं। उस समय विवाह प्रमाण-पत्र बनवाने का चलन नहीं था और न ही ऐसा कोई नियम था। पोर्टल विवाह प्रमाण-पत्र के बिना आवेदन सबमिट नहीं कर रहा है।”

वैकल्पिक दस्तावेजों को मिले मान्यता: शिक्षक संगठन

शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने इस पूरी व्यवस्था पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने सरकार और विभाग से मांग की है कि विवाह पंजीयन की इस अव्यावहारिक अनिवार्यता पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए।उन्होंने कहा कि सेवा पुस्तिका (सर्विस बुक), समग्र आईडी और अन्य शासकीय दस्तावेजों के आधार पर आवेदन स्वीकार किए जाने चाहिए। साथ ही, पोर्टल की तकनीकी खामियों को युद्धस्तर पर दूर किया जाए और आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाई जाए, ताकि तकनीकी बाधाओं के कारण कोई भी पात्र शिक्षक प्रक्रिया से बाहर न रह जाए।

संगठन का कहना है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक और कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनकी शादी 15 से 20 वर्ष पहले हुई थी। उस समय विवाह प्रमाण-पत्र बनवाना अनिवार्य नहीं था। अब अचानक इसे पोर्टल पर अनिवार्य कर दिए जाने से कई शिक्षकों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है।संगठन का कहना है कि ऐसे शिक्षकों के पास सर्विस बुक, परिवार की समग्र आईडी, नामांकन रिकॉर्ड और अन्य शासकीय दस्तावेज मौजूद हैं, जिनमें उनके वैवाहिक संबंधों का स्पष्ट उल्लेख है। इसके बावजूद विभाग इन दस्तावेजों को मान्यता न देकर केवल विवाह प्रमाण-पत्र की अनिवार्यता पर जोर दे रहा है, जिससे आवेदन प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।

ये आ रही हैं प्रमुख दिक्कतें

  • पति-पत्नी आधार पर आवेदन करने वालों से विवाह प्रमाण-पत्र अनिवार्य रूप से मांगा जा रहा है।
  • दिव्यांग शिक्षकों से एक वर्ष के भीतर जारी किया गया दिव्यांगता प्रमाण-पत्र मांगा जा रहा है।
  • पुराने स्थायी दिव्यांगता प्रमाण-पत्र मान्य नहीं किए जा रहे हैं।
  • पारस्परिक (म्यूचुअल) तबादले में कई शिक्षकों के नाम पोर्टल पर दिखाई नहीं दे रहे हैं।
  • दूसरे जिले में स्थानांतरण चाहने वाले शिक्षकों को सभी जिलों के विकल्प उपलब्ध नहीं हो रहे हैं।
  • प्रयोगशाला शिक्षक की योग्यता रखने वाले कई शिक्षकों को संबंधित पदों के विकल्प नहीं दिख रहे हैं।
  • मॉडल, उत्कृष्ट, सांदीपनि और पीएमश्री स्कूलों के पदों के विकल्प भी कई शिक्षकों को उपलब्ध नहीं हो रहे हैं।
  • म्यूचुअल ट्रांसफर का विकल्प कई मामलों में पोर्टल पर खुल ही नहीं रहा है।
  • जिला चयन के विकल्प दिखाई नहीं देने से शिक्षक अपनी पसंद का जिला नहीं चुन पा रहे हैं।
  • विभिन्न पदों से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ियों के कारण आवेदन पत्र सबमिट नहीं हो पा रहे हैं।

इन समस्याओं के कारण वर्षों से स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे हजारों शिक्षकों में असंतोष बढ़ रहा है और वे विभाग से तत्काल समाधान की मांग कर रहे हैं।

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