संघ शिक्षा वर्ग का प्रकट उत्सव में स्वयंसेवकों के दंड-घोष व योग प्रदर्शन ने मोहा मन
शिवपुरी: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्य भारत प्रांत के 15 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग (विद्यार्थी) के अंतर्गत सरस्वती विद्यापीठ आवासीय विद्यालय फतेहपुर में आयोजित प्रांतीय शिक्षा वर्ग के प्रकट उत्सव कार्यक्रम में राष्ट्रभक्ति, चरित्र निर्माण और सामाजिक संगठन का कार्य देखने को मिला। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य रूपेश कुमार ने उपस्थित महानुभावों को संबोधित करते हुए कहा कि संघ की सामान्य सी दिखाई देने वाली शाखाओं ने देश में असामान्य कार्य करने वाले कार्यकर्ताओं का निर्माण किया है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1925 में परम पूजनीय डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने ऐसे समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की थी जब हिन्दू समाज के पूजा स्थलों, मानबिंदुओं और सांस्कृतिक विरासत पर निरंतर आघात किए जा रहे थे। समाज का स्वाभिमान कुचला जा रहा था और बड़े स्तर पर मतांतरण का कुचक्र चलाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन सज्जन शक्ति की सक्रियता से ही संभव है। उन्होंने संघ द्वारा चलाए जा रहे पंच परिवर्तन विषयों का उल्लेख करते हुए समाज के जागरूक लोगों से इन विषयों पर संगठित और सक्रिय होकर कार्य करने का आह्वान किया। प्रारंभ में ध्वज प्रणाम एवं प्रार्थना का आयोजन किया गया।
तत्पश्चात स्वयंसेवकों ने 15 दिनों में प्राप्त प्रशिक्षण का दंड, घोष, योग एवं गीत आदि के माध्यम से आकर्षक प्रदर्शन किया। अनुशासित एवं प्रभावी प्रस्तुति को देखकर उपस्थित जनसमुदाय मंत्रमुग्ध हो गया और पूरे परिसर में उत्साह का वातावरण दिखाई दिया। कार्यक्रम में मंच पर विभाग संघचालक डॉ. गोविंद सिंह, जिला संघचालक राजेश गोयल, वर्ग अधिकारी पवन पाठक, सर्व वर्गाधिकारी सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवक, पदाधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
स्वयंसेवकों के कारण ही राष्ट्रहित के कार्य होते हैं संचालित
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित दंदरौआ धाम के महंत महामंडलेश्वर रामदास जी महाराज ने आशीर्वचन देते हुए कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के माध्यम से तैयार होने वाले राष्ट्रभक्त कार्यकर्ताओं के कारण देशभर में राष्ट्रहित के कार्य संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रभक्ति एवं चरित्र निर्माण से युक्त व्यक्तियों के कारण ही भारत अपनी संस्कृति और संस्कारों को सुरक्षित रखते हुए निरंतर आगे बढ़ रहा है।