लखनऊ में आग की घटना के बाद राजधानी के कोचिंग संस्थानों में आपात प्रबंधों की कमी के कारण सुरक्षा जांच की जाएगी।
लखनऊ के अलीगंज स्थित एक कोचिंग संस्थान में हुई आग की घटना के बाद जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। प्रशासन जल्द ही राजधानी के कोचिंग संस्थानों में सुरक्षा प्रबंधों की जांच करेगा और तय प्रावधानों का पालन सुनिश्चित कराएगा। बता दें कि राजधानी के कई हिस्सों में अधिकांश कोचिंग संस्थान बिना सुरक्षा प्रावधानों के संचालित हो रहे हैं।
राजधानी का सबसे बड़ा कोचिंग हब एमपी नगर जोन-1 और जोन-2 है। इसके अलावा पिपलानी, गोविंदपुरा, शाहपुरा, कोलार, करोंद और बैरागढ़ समेत शहर में सैकड़ों कोचिंग संस्थान सुरक्षा मानकों का पालन किए बिना ही संचालित हो रहे हैं। यहां मौजूद अधिकांश कोचिंग संचालकों में सुरक्षा नियमों को लेकर गंभीरता का अभाव देखा जा रहा है।
कोचिंग संस्थानों में ये हैं कमियां
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भोपाल के कोचिंग केंद्रों में लगातार बढ़ती भीड़ और उसकी तुलना में बुनियादी सुविधाओं की कमी।
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एमपी नगर के कोचिंग संस्थानों में अग्नि सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर की अनदेखी।
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किसी हादसे की स्थिति में गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।
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संकरी गलियों या बिना वेंटिलेशन वाली इमारतों में कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं।
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अधिकांश संस्थानों में आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।
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कई स्थानों पर ऐसी स्थिति है, जहां अग्निशमन दल समय पर पहुंच भी नहीं सकता।
कोचिंग संस्थानों की जांच करेंगे
कोचिंग संस्थानों के लिए बनी गाइडलाइन के प्रमुख बिंदु
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फायर सेफ्टी और वेंटिलेशन के तहत अग्नि सुरक्षा उपकरण, पर्याप्त स्थान, वेंटिलेशन और आपातकालीन निकास की व्यवस्था अनिवार्य की गई है।
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आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए कोचिंग सेंटरों में नियमित रूप से मॉक ड्रिल आयोजित करना अनिवार्य होगा।
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नियमों के उल्लंघन पर कोचिंग संस्थानों पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना और पंजीकरण रद्द करने की कार्रवाई का प्रावधान किया गया हैृ
"लखनऊ हादसे के बाद जल्द ही जिला प्रशासन राजधानी के कोचिंग संस्थानों की जांच कराएगा। छात्रों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ कोचिंग संस्थानों को नहीं करने दिया जाएगा।"
- भुवन गुप्ता, एसडीएम, गोविंदपुरा, भोपाल
मध्य प्रदेश सरकार ने भोपाल समेत सभी जिलों में संचालित हो रहे कोचिंग संस्थानों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोचिंग संस्थान विनियमन अधिनियम का ड्राफ्ट तैयार तो किया है, लेकिन यह अभी तक जमीनी स्तर पर लागू नहीं हो पाया है। लखनऊ हादसे से सबक लेते हुए जिला प्रशासन अब सख्त कदम उठाने की तैयारी में है।