मध्य प्रदेश के बांधवगढ़, कान्हा, पेंच समेत प्रमुख टाइगर रिजर्व 30 जून से 30 सितंबर तक बंद रहेंगे। जानिए सफारी बंद होने की वजह और कब फिर खुलेंगे पार्क।
भोपाल। मध्य प्रदेश समेत देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व और नेशनल पार्क 30 जून से 30 सितंबर तक पर्यटकों के लिए बंद हो जाएंगे। मानसून सीजन के दौरान वन्यजीवों के संरक्षण, प्रजनन गतिविधियों और जंगल मार्गों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए हर वर्ष यह व्यवस्था लागू की जाती है। ऐसे में जंगल सफारी और वन्यजीव पर्यटन के शौकीनों के पास जून के अंतिम दिनों तक ही सफारी का अवसर रहेगा।
मध्य प्रदेश के कई प्रमुख टाइगर रिजर्व होंगे बंद
मानसून अवधि के दौरान मध्य प्रदेश के प्रमुख टाइगर रिजर्व और संरक्षित वन क्षेत्रों में पर्यटकों का प्रवेश बंद रहेगा। इनमें
- बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व
- कान्हा टाइगर रिजर्व
- पेंच टाइगर रिजर्व
- सतपुड़ा टाइगर रिजर्व
- पन्ना टाइगर रिजर्व
- संजय-दुबरी टाइगर रिजर्व
- वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व
- रातापानी टाइगर रिजर्व
- माधव टाइगर रिजर्व शामिल हैं।
मानसून में क्यों बंद किए जाते हैं पार्क?
वन विभाग के अनुसार बारिश के मौसम में जंगलों में वन्यजीवों का प्रजनन काल शुरू होता है। इस दौरान मानव गतिविधियों को सीमित रखने से वन्यजीवों को प्राकृतिक वातावरण मिलता है। साथ ही लगातार बारिश के कारण जंगलों के कच्चे मार्गों पर सफारी संचालन भी सुरक्षित नहीं माना जाता।
देश के अन्य पार्कों में भी लागू रहेगा नियम
मध्य प्रदेश के अलावा देश के कई प्रसिद्ध राष्ट्रीय उद्यानों में भी मानसून के दौरान पर्यटक गतिविधियां सीमित हो जाती हैं। उत्तराखंड के जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के ढिकाला समेत कई प्रमुख जोन मध्य जून के आसपास बंद हो जाते हैं। राजस्थान के रणथंभौर टाइगर रिजर्व के कोर जोन जुलाई में बंद किए जाते हैं। कुछ पर्यटन जोन और बफर क्षेत्र परिस्थितियों के अनुसार सीमित रूप से खुले रह सकते हैं।
अक्टूबर में फिर शुरू होगी सफारी
मानसून समाप्त होने के बाद अक्टूबर और नवंबर में अधिकांश टाइगर रिजर्व और राष्ट्रीय उद्यान दोबारा पर्यटकों के लिए खोल दिए जाएंगे। हर वर्ष बारिश के बाद जंगलों की हरियाली और वन्यजीव गतिविधियों के कारण पर्यटन सीजन की नई शुरुआत होती है।
जून को माना जाता है सबसे बेहतर समय
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जून का महीना बाघ और अन्य वन्यजीवों की साइटिंग के लिहाज से सबसे अनुकूल माना जाता है। गर्मी के कारण जानवर अक्सर जलस्रोतों के आसपास दिखाई देते हैं, जिससे पर्यटकों को उन्हें देखने का बेहतर अवसर मिलता है।