मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर सात साल से चल रहे विवाद पर अब निर्णायक सुनवाई का रास्ता साफ हो गया है। हाई कोर्ट 15 जुलाई से रोजाना अंतिम बहस करेगा
मध्य प्रदेश में हजारों सरकारी नौकरियों, भर्ती प्रक्रियाओं और चयन सूचियों का भविष्य एक बार फिर अदालत की चौखट पर आ खड़ा हुआ है। सात वर्षों से लंबित 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण का मामला अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है, जहां से इसका असर सीधे लाखों अभ्यर्थियों और राज्य की आरक्षण व्यवस्था पर पड़ सकता है।
लंबे समय से चली आ रही कानूनी लड़ाई में अब अंतिम चरण की तैयारी शुरू हो गई है। जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की विशेष युगलपीठ ने सभी याचिकाओं की अंतिम सुनवाई 15 जुलाई से शुरू करने का आदेश दिया है। इसके बाद मामले की सुनवाई प्रतिदिन होगी।
निर्णायक मोड़ पर पहुंचा आरक्षण विवाद
27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रहा विवाद वर्ष 2019 से राज्य की भर्ती और नियुक्ति प्रक्रियाओं को प्रभावित करता रहा है। कई परीक्षाओं और चयन प्रक्रियाओं में नियुक्तियां इस कानूनी विवाद के कारण अटकी रहीं। अब अदालत की ओर से लगातार सुनवाई का फैसला इस मामले को अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
सरकार ने मांगा तैयारी का समय
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अंतिम बहस की तैयारी के लिए अतिरिक्त समय मांगा। प्रशासनिक न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की विशेष युगलपीठ ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए 15 जुलाई को दोपहर 2:30 बजे से अंतिम सुनवाई तय कर दी। अदालत ने संकेत दिया कि मामले को अब अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखा जाएगा।
91 याचिकाओं पर एक साथ होगी सुनवाई
इस विवाद से जुड़ी 91 याचिकाएं और संबद्ध प्रकरण फिलहाल विचाराधीन हैं। सभी मामलों को एक साथ सुनकर अदालत कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर अंतिम बहस करेगी। यही वजह है कि यह सिर्फ आरक्षण का मामला नहीं बल्कि राज्य की कई भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ा व्यापक प्रशासनिक मुद्दा बन चुका है।
भर्तियों और अभ्यर्थियों पर सीधा असर
सरकारी विभागों में रिक्त पदों की भर्ती, चयन सूची जारी होने और नियुक्ति आदेशों पर इस विवाद का प्रभाव लगातार देखने को मिला है। ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों के साथ-साथ अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थी भी इस मामले के अंतिम फैसले का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि अदालत का निर्णय भविष्य की भर्ती नीतियों को भी प्रभावित कर सकता है।
15 जुलाई पर टिकी प्रदेश की नजर
राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर भी इस मामले को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। अंतिम सुनवाई शुरू होने के बाद अदालत के समक्ष आरक्षण की संवैधानिक वैधता, प्रतिनिधित्व और कानूनी प्रावधानों से जुड़े सभी पक्ष रखे जाएंगे। आने वाले हफ्तों में होने वाली बहस न केवल 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण विवाद की दिशा तय करेगी, बल्कि मध्य प्रदेश की आरक्षण नीति और हजारों लंबित नियुक्तियों के भविष्य पर भी महत्वपूर्ण असर डाल सकती है।