ग्वालियर में साइबर ठगों ने बुजुर्ग महिला को डिजिटल गिरफ्तारी का भय दिखाकर 1.57 करोड़ रुपये की ठगी की। पुलिस और साइबर टीम ने जांच शुरू की है।
ग्वालियर में साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ठगों ने केंद्रीय जांच एजेंसियों और पुलिस अधिकारियों का रूप धरकर एक 69 वर्षीय सेवानिवृत्त स्वास्थ्यकर्मी से 1.57 करोड़ रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने महिला को 33 दिनों तक कथित सरकारी जांच और गिरफ्तारी का भय दिखाकर मानसिक दबाव में रखा तथा अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करा ली।पीड़िता मीनाक्षी नाखरे, जो स्वास्थ्य विभाग में प्रयोगशाला तकनीशियन के पद से सेवानिवृत्त हो चुकी हैं, ने इस मामले की शिकायत ग्वालियर क्राइम ब्रांच में दर्ज कराई है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
एक फोन कॉल से शुरू हुई ठगी
महिला के अनुसार ठगी की शुरुआत एक फोन कॉल से हुई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को दूरसंचार विभाग का अधिकारी बताया और दावा किया कि उनके नाम से एक मोबाइल नंबर तथा बैंक खाता संचालित हो रहा है, जिसका उपयोग अवैध वित्तीय लेन-देन में किया गया है।जब महिला ने आरोपों से इनकार किया तो जालसाजों ने उन्हें गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाना शुरू कर दिया।
वीडियो कॉल पर बनाया सरकारी जांच का माहौल
कुछ समय बाद ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए महिला से संपर्क किया। वीडियो कॉल के दौरान पुलिस कार्यालय और सरकारी जांच एजेंसी जैसा माहौल दिखाया गया, जिससे पूरी प्रक्रिया वास्तविक प्रतीत हो रही थी।एक व्यक्ति ने स्वयं को वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि एक बैंक अधिकारी की गिरफ्तारी के बाद महिला के नाम से जुड़े दस्तावेज मिले हैं। इसके आधार पर उन पर अवैध वित्तीय लेन-देन में शामिल होने का आरोप लगाया गया।ठगों ने महिला को बताया कि उनके बैंक खातों की जांच की जानी है और सत्यापन पूरा होने तक उनकी जमा राशि को सुरक्षित खातों में स्थानांतरित करना होगा। लगातार मानसिक दबाव और भय के कारण महिला उनकी बातों पर विश्वास करती चली गईं।
जांच के नाम पर 1.57 करोड़ रुपये ट्रांसफर
जानकारी के मुताबिक आरोपियों ने लगभग 33 दिनों तक महिला से लगातार संपर्क बनाए रखा। इस दौरान उन्हें भरोसा दिलाया गया कि जांच पूरी होने के बाद उनकी पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई के डर से महिला ने आरटीजीएस के माध्यम से कुल 1.57 करोड़ रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। यह रकम कई राज्यों और शहरों में संचालित खातों में भेजी गई।बाद में ठगों ने दावा किया कि जांच पूरी हो चुकी है और जल्द ही उन्हें क्लीन चिट से संबंधित दस्तावेज भेज दिए जाएंगे। लेकिन तय समय बीतने के बाद सभी मोबाइल नंबर बंद हो गए, जिससे महिला को ठगी का एहसास हुआ।
दिल्ली पहुंचकर खुला ठगी का राज
सच्चाई जानने के लिए महिला दिल्ली पहुंचीं। वहां संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेने पर उन्हें पता चला कि उनके साथ साइबर ठगी हुई है। इसके बाद उन्होंने पुलिस से संपर्क कर शिकायत दर्ज कराई।पुलिस संदिग्ध बैंक खातों को फ्रीज कराने की प्रक्रिया में जुटी है, जबकि साइबर विशेषज्ञ मामले के तकनीकी पहलुओं की जांच कर रहे हैं।
पुलिस ने जारी की चेतावनी
पुलिस और साइबर विशेषज्ञों ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति स्वयं को सीबीआई, ईडी, पुलिस, दूरसंचार विभाग या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर धनराशि ट्रांसफर करने, खाते की जांच कराने या रकम सुरक्षित खाते में जमा कराने के लिए कहे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से इस तरह धन ट्रांसफर करने के निर्देश नहीं देती। ऐसी स्थिति में तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी पुलिस थाने से संपर्क करना चाहिए।