अलीगढ़ की प्रसिद्ध धातु मूर्तियों को GI टैग मिल गया है। उत्तर प्रदेश अब 83 GI उत्पादों के साथ देश में पहले स्थान पर बना हुआ है।
अलीगढ़। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ की विश्व प्रसिद्ध धातु मूर्तियों (Metal Sculptures) को आधिकारिक तौर पर GI (Geographical Indication) टैग मिल गया है। इस उपलब्धि के साथ उत्तर प्रदेश ने चार नए GI टैग जोड़ते हुए कुल 83 GI उत्पादों के साथ देश में अपना शीर्ष स्थान बरकरार रखा है। यह मान्यता अलीगढ़ की पारंपरिक शिल्पकला, स्थानीय कारीगरों और निर्यात उद्योग के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। अलीगढ़ की पीतल और अन्य धातुओं से निर्मित मूर्तियां लंबे समय से देश और विदेश में अपनी उत्कृष्ट कारीगरी के लिए प्रसिद्ध रही हैं। GI टैग मिलने से अब इन उत्पादों को कानूनी संरक्षण और वैश्विक स्तर पर अधिक पहचान मिलने की उम्मीद है।
क्या है GI टैग और क्यों है महत्वपूर्ण?
Geographical Indication (GI) Tag किसी विशेष क्षेत्र में बनने वाले उत्पाद की विशिष्टता और प्रामाणिकता की कानूनी पहचान है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि संबंधित उत्पाद केवल उसी क्षेत्र की पारंपरिक तकनीक और कौशल से निर्मित माना जाएगा। GI टैग मिलने के बाद उत्पाद की पहचान और ब्रांड वैल्यू बढ़ती है। नकली और जालसाजी वाले उत्पादों पर रोक लगाने में मदद मिलती है। कारीगरों और उत्पादकों को बेहतर बाजार मूल्य मिल सकता है। निर्यात के नए अवसर खुलते हैं।
दुनिया के कई देशों में निर्यात होती हैं अलीगढ़ की मूर्तियां
अलीगढ़ में निर्मित पीतल और अन्य धातुओं की मूर्तियां अमेरिका, यूरोप, खाड़ी देशों और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में बड़े पैमाने पर निर्यात की जाती हैं। भारतीय संस्कृति, देवी-देवताओं की प्रतिमाओं और पारंपरिक कलाकृतियों की वैश्विक मांग के कारण यह उद्योग विदेशी मुद्रा अर्जित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। GI टैग मिलने से अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच इन उत्पादों की विश्वसनीयता और बढ़ने की संभावना है।
लंबी प्रक्रिया के बाद मिली मान्यता
अलीगढ़ ब्रास स्टेच्यू एंड आर्टवेयर सप्लायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष हनुमंत राम गांधी ने बताया कि एसोसिएशन ने GI टैग के लिए आवेदन किया था। इस प्रक्रिया में "GI Man of India" के नाम से प्रसिद्ध पद्मश्री डॉ. रजनी कांत का तकनीकी सहयोग भी महत्वपूर्ण रहा। चेन्नई स्थित GI रजिस्ट्री में विभिन्न परीक्षणों, तकनीकी मूल्यांकन और प्रस्तुतियों के बाद अलीगढ़ की इस पारंपरिक कला को यह विशेष मान्यता प्रदान की गई।
स्थानीय कारीगरों को होगा सीधा लाभ
GI टैग मिलने से स्थानीय कारीगरों को उत्पादों के बेहतर दाम मिल सकेंगे। निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलेगा। अलीगढ़ की पारंपरिक कला को नई पहचान मिलेगी। युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।
GI टैग में उत्तर प्रदेश का दबदबा कायम
चार नए GI टैग मिलने के बाद उत्तर प्रदेश के GI उत्पादों की संख्या बढ़कर 83 हो गई है। इससे राज्य ने GI उत्पादों के मामले में देश में अपना पहला स्थान बरकरार रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि GI टैग केवल सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का माध्यम नहीं है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और निर्यात को मजबूत करने का भी प्रभावी साधन बन रहा है।