अमेरिका ने ईरान के तेल निर्यात पर 60 दिनों की बड़ी राहत दे दी है। इस फैसले से भारत समेत कई देशों के लिए सस्ता तेल खरीदने का रास्ता खुल सकता है।
मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के रिश्तों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। वॉशिंगटन ने ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों की बिक्री पर लगी कई पाबंदियों में 60 दिनों की छूट देने का फैसला किया है। यह कदम स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच हुई वार्ता के बाद सामने आया है।
इस फैसले का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रहेगा। दुनिया के बड़े ऊर्जा आयातकों में शामिल भारत समेत कई देशों के लिए ईरानी तेल तक पहुंच फिर आसान हो सकती है। साथ ही वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।
ईरानी तेल पर 60 दिन की राहत क्यों अहम
अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने 21 अगस्त 2026 तक अस्थायी सामान्य लाइसेंस जारी किया है। इसके तहत ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों के उत्पादन, बिक्री, डिलीवरी और संबंधित वित्तीय सेवाओं को सीमित अवधि के लिए अनुमति दी गई है। यह फैसला दोनों देशों के बीच चल रही शांति वार्ता का हिस्सा माना जा रहा है।
भारत के लिए खुल सकता है सस्ते तेल का विकल्प
अमेरिका द्वारा दी गई छूट के बाद भारत जैसे देश फिर से ईरानी तेल खरीदने की संभावनाओं पर विचार कर सकते हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले भारत ईरान के प्रमुख तेल खरीदारों में शामिल था। विशेषज्ञ मानते हैं कि अतिरिक्त आपूर्ति आने से वैश्विक बाजार में कीमतों पर दबाव बन सकता है, जिसका फायदा आयातक देशों को मिलेगा।
IAEA इंस्पेक्टरों की वापसी पर बनी सहमति
वार्ता के दौरान ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों को दोबारा अपने परमाणु कार्यक्रम की निगरानी करने की अनुमति देने पर सहमति जताई है। अमेरिका इसे भरोसा बहाली की दिशा में बड़ा कदम मान रहा है। दोनों देशों के बीच परमाणु मुद्दा लंबे समय से विवाद का केंद्र रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट पर कम हो सकता है संकट
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी प्रगति हुई है। अमेरिका का कहना है कि ईरान ने इस मार्ग पर जहाजों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने का भरोसा दिया है। हाल के महीनों में इसी मार्ग पर तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई थी।
तेल बाजार ने तुरंत दिया संकेत
अमेरिका के फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई। निवेशकों ने इसे आपूर्ति बढ़ने और मध्य पूर्व में तनाव कम होने के संकेत के रूप में देखा। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि पूरी स्थिति अभी भी वार्ता की सफलता और जमीनी हालात पर निर्भर करेगी।
बातचीत जारी, लेकिन सतर्क है ईरान
स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दिन भी वार्ता जारी रही। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बातचीत को सकारात्मक बताया और कहा कि अंतिम समझौते की मजबूत नींव तैयार हुई है। दूसरी ओर ईरान ने साफ किया है कि बातचीत के बावजूद उसकी सेना पूरी तरह अलर्ट पर रहेगी और किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए तैयार है।