अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में अहम बातचीत शुरू हो गई है। ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट पर 60 दिन की मोहलत दी है, जबकि जहाजों की आवाजाही और वैश्विक तेल बाजार को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
मिडिल ईस्ट में तनाव कम करने की कोशिशों के बीच अमेरिका और ईरान बातचीत की मेज पर पहुंच गए हैं, लेकिन समुद्री व्यापार की सबसे अहम लाइफलाइन होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अनिश्चितता अभी खत्म नहीं हुई है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का नया बयान वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग सेक्टर का ध्यान खींच रहा है।
ट्रम्प ने संकेत दिया है कि यदि अगले 60 दिनों में ईरान के साथ स्थायी समझौता नहीं बनता है तो अमेरिका भविष्य में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने पर विचार कर सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि फिलहाल सीजफायर अवधि में ऐसी कोई वसूली नहीं होगी।
स्विट्जरलैंड में शुरू हुई अहम कूटनीतिक कवायद
अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं, जहां दोनों देशों के बीच अहम वार्ता होनी है। अमेरिकी टीम में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शामिल हैं। वहीं ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराघची नेतृत्व कर रहे हैं। ईरान ने बातचीत से पहले पाकिस्तान और कतर के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बैठकों का भी कार्यक्रम तय किया है, जिससे साफ है कि क्षेत्रीय मध्यस्थ इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा रणनीतिक मुद्दा
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में शामिल होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति अब भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड फोर्स ने जहाजों को इस क्षेत्र से दूरी बनाने की चेतावनी दी है। वहीं कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि फिलहाल जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध जैसी स्थिति बनी हुई है। शिपिंग कंपनियां भी जोखिम को देखते हुए सतर्क रुख अपना रही हैं। इस समुद्री मार्ग से जुड़े किसी भी फैसले का असर सीधे वैश्विक तेल सप्लाई और कीमतों पर पड़ सकता है।
भारत के लिए राहत की खबर
तनावपूर्ण माहौल के बीच भारत से जुड़े तीन तेल टैंकर सुरक्षित रूप से होर्मुज स्ट्रेट पार कर चुके हैं। इन जहाजों में 8.6 लाख मीट्रिक टन से अधिक कच्चा तेल मौजूद था और 94 भारतीय क्रू सदस्य भी सवार थे। ऐसे समय में यह घटनाक्रम भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि देश अपनी जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है।
ईरान को दिख रही आर्थिक राहत
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने दावा किया है कि अमेरिका के साथ हुए शुरुआती समझौते के बाद कतर में फंसी करीब 6 अरब डॉलर की राशि ईरान को वापस मिल सकती है। उनके अनुसार समझौते की शर्तें तेहरान के हित में हैं और आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम दिखाई देंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान लंबे समय से आर्थिक प्रतिबंधों और विदेशी मुद्रा दबाव का सामना कर रहा है।
इजराइल के भीतर भी उठ रहे सवाल
इजराइल में सामने आए एक सर्वे ने वहां की राजनीतिक और सुरक्षा बहस को नई दिशा दे दी है। सर्वे के मुताबिक बड़ी संख्या में लोगों का मानना है कि हालिया संघर्ष और उसके बाद की कूटनीतिक प्रक्रिया में ईरान अधिक मजबूत स्थिति में दिखाई दिया है। कई प्रतिभागियों ने यह भी कहा कि सैन्य अभियान से इजराइल की सुरक्षा अपेक्षित स्तर पर मजबूत नहीं हुई। ऐसे आंकड़े प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की रणनीति पर घरेलू दबाव बढ़ा सकते हैं।
गाजा हमले ने फिर बढ़ाई चिंता
गाजा के बुरेज शरणार्थी शिविर में हुए ड्रोन हमले में अल जजीरा के कैमरामैन अहमद विशाह की मौत हो गई। मीडिया संस्थान ने हमले में कई अन्य लोगों के घायल होने की भी जानकारी दी है। दूसरी तरफ इजराइली सेना ने दावा किया है कि मृतक हमास की सैन्य शाखा से जुड़े थे, हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया गया है। इस घटना ने संघर्ष क्षेत्र में पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।