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ट्रंप का दावा, भारत ने किया खंडन

ऑपरेशन सिंदूर पर ट्रंप का पाकिस्तान को लेकर दावा, भारत ने फिर किया खारिज

डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि उनके हस्तक्षेप से भारत-पाक संघर्ष में करोड़ों जानें बचीं। भारत ने दोहराया कि सीजफायर द्विपक्षीय सैन्य बातचीत से हुआ।


ऑपरेशन सिंदूर पर ट्रंप का पाकिस्तान को लेकर दावा भारत ने फिर किया खारिज

Trump big claim on Operation Sindoor |

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान तनाव को लेकर बड़ा दावा किया है। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि अगर उन्होंने दखल न दिया होता तो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ आज जिंदा नहीं होते और भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान करोड़ों लोगों की जान जा सकती थी। ट्रंप ने यह भी कहा कि उनके हस्तक्षेप से संभावित परमाणु टकराव टल गया।

‘3.5 करोड़ लोगों की जान बचाई’ का दावा

ट्रंप ने अपने ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ संबोधन में कहा कि उन्होंने अपने पहले दस महीनों में आठ बड़े युद्ध रुकवाए। उन्होंने दावा किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच हालात इतने गंभीर थे कि परमाणु युद्ध की आशंका बन गई थी। उनके मुताबिक, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने उनसे कहा था कि अगर उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया होता तो लगभग 3.5 करोड़ लोग मारे जा सकते थे।

किन-किन संघर्षों का लिया जिक्र

ट्रंप ने विश्व के अलग अलग देशों मे विवादों को सुलझाने का दावा किया है। इनमें इजराइल-हमास, इजराइल-ईरान, इजिप्ट- इथोपिया, भारत-पाकिस्तान, सर्बिया-कोसोवो,  रवांडा-कांगो, आर्मेनिया-अजरबैजान और कंबोडिया-थाईलैंड जैसे संघर्ष शामिल बताए। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि मजाक नहीं, बल्कि कूटनीतिक सफलता है।

भारत ने खारिज किए दावे

भारत ने पहले भी ऐसे दावों को सिरे से नकारा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर से जब पूछा गया कि संघर्ष के दौरान अमेरिका की क्या भूमिका थी, तो उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा था 'यूएस, यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका में था।' इस बयान का स्पष्ट संदेश था कि युद्धविराम में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं थी।

DGMO स्तर पर हुई थी बातचीत

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी साफ किया था कि संघर्ष विराम पाकिस्तान के डीजीएमओ द्वारा हॉटलाइन पर संपर्क करने के बाद संभव हुआ। दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच बातचीत से ही हालात सामान्य हुए, न कि किसी बाहरी दबाव से। ट्रंप के ताजा बयान ने एक बार फिर कूटनीतिक हलकों में बहस छेड़ दी है, लेकिन भारत का आधिकारिक रुख पहले जैसा ही कायम है।

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