कतर के प्रमुख गैस टर्मिनल में हुए भीषण धमाके में 13 लोगों की मौत और 54 लोग घायल हुए हैं। हादसे के बाद वैश्विक गैस बाजार में चिंता बढ़ गई है। भारत समेत कई देशों की ऊर्जा आपूर्ति पर इसके असर को लेकर निग
मध्य पूर्व में युद्धविराम की उम्मीदों के बीच कतर से एक चिंताजनक खबर सामने आई है। देश के प्रमुख गैस निर्यात केंद्र रास लाफान इंडस्ट्रियल एरिया स्थित बरजान गैस सप्लाई फैसिलिटी में हुए धमाके ने वैश्विक ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है। हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई, जबकि 54 लोग घायल बताए गए हैं। 18 लोगों का अब भी पता नहीं चल सका है।
यह दुर्घटना उस समय हुई जब ईरान-अमेरिका तनाव के कारण प्रभावित गैस उत्पादन को दोबारा शुरू करने की तैयारी चल रही थी। ऐसे में हादसे ने केवल कतर ही नहीं, बल्कि उन देशों की चिंता भी बढ़ा दी है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र की गैस आपूर्ति पर निर्भर हैं।
धमाके के बाद बचाव अभियान जारी
कतर के ऊर्जा मंत्री शेरिदा अल काबी के मुताबिक हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य तेज कर दिए गए हैं। घायलों का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है, जबकि लापता लोगों की तलाश जारी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार विस्फोट प्लांट के पुनः संचालन की प्रक्रिया के दौरान हुआ, हालांकि हादसे के कारणों की आधिकारिक जांच अभी जारी है।
भारत और पाकिस्तान के नागरिकों की मौत की आशंका
कतर में बड़ी संख्या में भारतीय और पाकिस्तानी नागरिक काम करते हैं। प्रारंभिक रिपोर्टों में मृतकों में दोनों देशों के नागरिकों के शामिल होने की बात सामने आई है, हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर संख्या स्पष्ट नहीं की गई है। दोहा स्थित भारतीय दूतावास ने घटना पर चिंता जताते हुए प्रभावित लोगों की हरसंभव सहायता का भरोसा दिया है और हेल्पलाइन भी जारी की है।
वैश्विक गैस बाजार पर पड़ सकता है असर
रास लाफान क्षेत्र दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण गैस उत्पादन और निर्यात केंद्रों में गिना जाता है। संबंधित प्लांट प्रतिदिन करीब 1.4 अरब स्टैंडर्ड क्यूबिक फीट गैस उत्पादन क्षमता रखता है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के कारण पहले ही गैस निर्यात प्रभावित रहा है। अब इस हादसे ने उत्पादन और सप्लाई सामान्य होने की उम्मीदों को झटका दिया है।
भारत समेत एशियाई देशों की बढ़ी नजर
कतर दुनिया के सबसे बड़े एलएनजी निर्यातकों में शामिल है। जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और भारत जैसे कई देश ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी क्षेत्र की गैस पर निर्भर हैं। यदि उत्पादन बहाली में देरी होती है तो अंतरराष्ट्रीय गैस कीमतों में दबाव बढ़ सकता है। इसका असर एलपीजी और ऊर्जा लागत पर भी देखने को मिल सकता है, हालांकि फिलहाल सप्लाई बाधित होने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
युद्ध के बाद सामान्य हालात की कोशिश को झटका
ईरान-अमेरिका वार्ता और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही बहाल होने की उम्मीदों के बीच यह हादसा सामने आया है। कतर उत्पादन और निर्यात को सामान्य करने की दिशा में बढ़ रहा था, लेकिन गैस टर्मिनल में हुए विस्फोट ने क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़े नए सवाल खड़े कर दिए हैं।