विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में भारत-अमेरिका संबंधों और आतंकवाद पर अपने विचार स्पष्ट किए, जोर देते हुए कि साझेदार देशों को भारत की चिंताओं को समझना चाहिए।
न्यूयॉर्क में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर भारत की सुरक्षा चिंताओं को स्पष्ट किया है। एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि सीमा पार आतंकवाद भारत के लिए बेहद अहम मुद्दा है और अगर साझेदार देश इस चिंता को पर्याप्त रूप से नहीं समझते हैं, तो इसका असर द्विपक्षीय रिश्तों पर पड़ सकता है।
जयशंकर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब अमेरिका और पाकिस्तान के बीच हाल के महीनों में संपर्क और सहयोग बढ़ा है। उन्होंने किसी देश का नाम लिए बिना कहा कि भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी चाहने वाले देशों को उसकी बुनियादी संवेदनशीलताओं को समझना होगा।
आतंकवाद पर भारत की चिंता सबसे अहम
पूर्व अमेरिकी राजनयिक और एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के फेलो डेनियल रसेल के साथ बातचीत में जयशंकर से भारत-अमेरिका संबंधों को बेहतर दिशा में ले जाने को लेकर सवाल किया गया था।जवाब में उन्होंने आतंकवाद को भारत की प्रमुख चिंताओं में गिनाया। उनका कहना था कि भारत कई दशकों से पड़ोसी देश से होने वाले आतंकवाद का सामना करता रहा है। ऐसे में अगर किसी साझेदार को इस मुद्दे की गंभीरता और भारत की चिंता की पर्याप्त समझ नहीं है, तो उसका असर रिश्ते पर पड़ना स्वाभाविक है।
अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों पर भारत की नजर
जयशंकर ने भारत-अमेरिका रिश्तों को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि भारत चाहता है कि यह साझेदारी आगे बढ़े। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि व्यापार, टैरिफ और सुरक्षा से जुड़े मतभेदों के बीच जमीनी परिस्थितियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।अमेरिका के पाकिस्तान के साथ बढ़ते संपर्क के बीच आतंकवाद को लेकर भारत की चिंता इसी व्यापक संदर्भ में सामने आई है।
चीन के साथ रिश्तों पर भी जयशंकर ने स्थिति साफ की
विदेश मंत्री ने भारत-चीन संबंधों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2020 के सीमा तनाव के बाद दोनों देशों के रिश्तों में सुधार हुआ है और सीमा पर स्थिति पहले की तुलना में बेहतर है। हालांकि, दोनों देशों के बीच सभी मुद्दे अभी खत्म नहीं हुए हैं।जयशंकर के मुताबिक, भारत-चीन संबंधों की दिशा काफी हद तक सीमा पर बने हालात से जुड़ी रहेगी। उनका कहना था कि सीमा पर तनाव दोनों देशों के हित में नहीं है और ऐसे विवाद में लंबे समय तक फंसे रहने का फायदा किसी तीसरे पक्ष को मिल सकता है।
दुनिया के सामने 4F संकट की चुनौती
जयशंकर ने मौजूदा वैश्विक हालात को भी चिंताजनक बताया। उन्होंने दुनिया के सामने 4F संकट—Food, Fuel, Fertiliser और Finance यानी भोजन, ईंधन, खाद और वित्त से जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख किया।उनके मुताबिक, अलग-अलग क्षेत्रों में चल रहे संघर्ष, आर्थिक दबाव और सप्लाई चेन की अस्थिरता ने देशों के सामने नई चुनौतियां खड़ी की हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा दौर में कूटनीति पहले की तुलना में अधिक जटिल हो गई है।फिलहाल जयशंकर के बयान का मुख्य संदेश यही है कि भारत-अमेरिका साझेदारी को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी रहेगी, लेकिन भारत अपनी सुरक्षा चिंताओं, खासकर सीमा पार आतंकवाद, को लेकर साझेदार देशों से स्पष्ट समझ की अपेक्षा रखता है।