अमेरिका-ईरान समझौते के बाद इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच भी युद्धविराम लागू होने की खबर है। लेकिन जमीनी हालात और नेताओं के बयान बता रहे हैं कि तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते के बाद पश्चिम एशिया में एक और बड़ी कूटनीतिक पहल सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इजराइल और हिजबुल्लाह ने भी युद्धविराम पर सहमति जताई है। अमेरिका और कतर की मध्यस्थता से तैयार हुए इस समझौते को क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव को रोकने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
हालांकि सीजफायर लागू होने के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं दिख रहे। दोनों पक्षों के बयान और जमीनी घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि संघर्ष भले फिलहाल थमा हो, लेकिन अविश्वास अभी भी कायम है।
शांति समझौते के बाद खुला नया कूटनीतिक मोर्चा
सूत्रों के अनुसार अमेरिका, कतर और ईरान की भूमिका से इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी। यह कदम ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान ने भी हाल ही में संघर्ष विराम प्रक्रिया शुरू की है। क्षेत्रीय स्थिरता की दृष्टि से इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे कई मोर्चों पर चल रही सैन्य गतिविधियों को सीमित करने की कोशिश की जा रही है।
ट्रम्प का संदेश और ईरान पर दबाव की रणनीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने समझौते के बाद ईरान को लेकर सख्त रुख बरकरार रखा। उन्होंने दावा किया कि ईरान बातचीत के लिए मजबूरी में आगे आया है और उसकी सैन्य क्षमता पहले की तुलना में काफी कमजोर हो चुकी है। ट्रम्प का यह बयान बताता है कि शांति प्रक्रिया के साथ-साथ दबाव की अमेरिकी नीति भी जारी रहने वाली है।
हिजबुल्लाह ने युद्धविराम के बीच दिया सख्त संकेत
युद्धविराम लागू होने की खबरों के बीच हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने साफ कहा कि उनका संगठन इजराइली कब्जे को स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने यह भी दोहराया कि यदि उन पर हमला हुआ तो जवाब भी सैन्य तरीके से दिया जाएगा। इस बयान से संकेत मिलता है कि सीजफायर को स्थायी शांति समझना अभी जल्दबाजी हो सकती है।
होर्मुज स्ट्रेट में लौटने लगी कारोबारी गतिविधियां
अमेरिका-ईरान समझौते का असर समुद्री व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की संख्या बढ़ी है और तेल परिवहन में धीरे-धीरे रफ्तार लौट रही है। वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए यह राहत की खबर है, क्योंकि लंबे समय से इस मार्ग में अस्थिरता बनी हुई थी। हालांकि समुद्री क्षेत्र में फंसे जहाजों और नाविकों की बड़ी संख्या बताती है कि स्थिति पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लगेगा।
प्रतिबंधों में ढील से बदल सकता है ईरान का आर्थिक भविष्य
विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में राहत मिलती है तो उसकी तेल आय में बड़ा उछाल आ सकता है। अनुमान है कि पूर्ण क्षमता से निर्यात शुरू होने पर ईरान सालाना लाखों करोड़ रुपये के बराबर राजस्व हासिल कर सकता है। यही वजह है कि मौजूदा वार्ताओं को केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार के नजरिए से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सीजफायर लागू होने के बावजूद लेबनान में हिंसा की घटनाएं पूरी तरह नहीं रुकी हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि यह समझौता क्षेत्र को स्थायी शांति की ओर ले जाता है या फिर यह केवल एक अस्थायी विराम साबित होता है।