स्विट्जरलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता के दौरान ट्रम्प की धमकी ने नया विवाद खड़ा कर दिया। ईरान ने बैठक बीच में छोड़ दी और साफ कर दिया कि दबाव की राजनीति के बीच कोई बातचीत नहीं होगी।
अमेरिका और ईरान के बीच रिश्तों में नरमी की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। स्विट्जरलैंड में चल रही कूटनीतिक बातचीत उस समय विवाद में बदल गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के एक बयान पर ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने कड़ा विरोध जताते हुए बैठक छोड़ दी।
तेहरान का कहना है कि बातचीत और धमकी साथ-साथ नहीं चल सकती। यही वजह रही कि ईरानी प्रतिनिधियों ने न केवल वार्ता रोक दी बल्कि अमेरिकी अधिकारियों के साथ औपचारिक मुलाकात और फोटो सेशन से भी दूरी बना ली।
ट्रम्प के बयान ने बिगाड़ा माहौल
ईरानी संसद अध्यक्ष और वार्ता प्रतिनिधिमंडल के सदस्य मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने दावा किया कि बातचीत करीब 80 मिनट तक सामान्य तरीके से चल रही थी। इसी दौरान उन्हें ट्रम्प के उस बयान की जानकारी मिली जिसमें ईरान और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर सख्त चेतावनी दी गई थी। गालिबाफ के मुताबिक इसके बाद ईरानी टीम ने बैठक समाप्त करने का फैसला लिया। बाद में अमेरिकी पक्ष ने मध्यस्थों के जरिए दोबारा बातचीत की इच्छा जताई, लेकिन तेहरान ने इसे स्वीकार नहीं किया।
हाथ मिलाने से इनकार बना नया संदेश
वार्ता विफल होने के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ हाथ मिलाने और संयुक्त तस्वीर खिंचवाने से भी इनकार कर दिया। कूटनीतिक हलकों में इसे प्रतीकात्मक लेकिन महत्वपूर्ण संदेश माना जा रहा है। इस घटनाक्रम ने संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी अभी भी गहरी है और राजनीतिक बयानबाजी किसी भी समय बातचीत की दिशा बदल सकती है।
बातचीत जारी, लेकिन सेना अलर्ट मोड में
ईरान ने साफ किया है कि कूटनीतिक प्रक्रिया चलने के बावजूद उसकी सैन्य तैयारियों में कोई कमी नहीं की गई है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के अधिकारियों ने कहा कि देश किसी भी संभावित खतरे का जवाब देने के लिए तैयार है। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने यहां तक कहा कि यदि किसी विरोधी देश की ओर से खतरा महसूस हुआ तो ईरान पहले कार्रवाई करने की रणनीति भी अपना सकता है। इससे क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह खत्म होने की संभावना फिलहाल नजर नहीं आ रही।
तेल बाजार और होर्मुज पर टिकी दुनिया की नजर
वार्ता के समानांतर होर्मुज स्ट्रेट भी वैश्विक चर्चा के केंद्र में बना हुआ है। अमेरिका ने ईरानी तेल निर्यात पर कुछ समय के लिए राहत दी है, जबकि ईरान और ओमान समुद्री मार्ग के भविष्य के संचालन पर चर्चा कर रहे हैं। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी मार्ग से गुजरता है। ऐसे में किसी भी राजनीतिक या सैन्य तनाव का असर सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल कीमतों पर पड़ सकता है। यही कारण है कि अमेरिका, खाड़ी देशों और अंतरराष्ट्रीय बाजार की निगाहें इस वार्ता प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं।
परमाणु मुद्दे पर अभी भी तस्वीर साफ नहीं
ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम की सख्त अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए तैयार हो गया है। हालांकि तेहरान ने इस दावे की स्पष्ट पुष्टि नहीं की है। ईरान का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी के साथ उसका सहयोग पहले से तय नियमों के अनुसार जारी है। यही विरोधाभास बताता है कि दोनों पक्ष फिलहाल अलग-अलग संदेश दे रहे हैं। ऐसे में स्विट्जरलैंड वार्ता को अंतिम सफलता से ज्यादा एक नाजुक कूटनीतिक पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है, जहां एक बयान भी पूरे समीकरण बदल सकता है।