अमेरिका-ईरान समझौते के 14 प्रमुख बिंदु सामने आए। होर्मुज स्ट्रेट, परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और 300 अरब डॉलर फंड पर क्या सहमति बनी, पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर एक प्रस्तावित समझौते के मसौदे की जानकारी सामने आई है। दस्तावेज के अनुसार दोनों देशों ने 14 प्रमुख बिंदुओं पर सहमति जताई है। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को 60 दिनों तक बिना अतिरिक्त शुल्क के खोलना, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण, आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर के फंड का प्रस्ताव शामिल है।
समझौते के सबसे बड़े 5 बिंदु
1. होर्मुज स्ट्रेट 60 दिनों तक बिना शुल्क खुलेगा
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति जताई है। मसौदे के अनुसार शुरुआती 60 दिनों तक जहाजों से अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।
2. अमेरिका हटाएगा समुद्री नाकेबंदी
ईरानी बंदरगाहों पर लागू अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी 30 दिनों के भीतर समाप्त करने का प्रस्ताव है, जिससे तेल और अन्य वस्तुओं का निर्यात दोबारा शुरू हो सकेगा।
3. परमाणु हथियार नहीं बनाएगा ईरान
दस्तावेज में ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। संवर्धित यूरेनियम के भविष्य पर आगे अलग वार्ता की जाएगी और प्रक्रिया की निगरानी IAEA करेगी।
4. 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण फंड
ईरान के पुनर्निर्माण और विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर (करीब 28 लाख करोड़ रुपए) के फंड की योजना का उल्लेख किया गया है। हालांकि इसके स्रोत और वितरण पर अंतिम समझौता अभी बाकी है।
5. तेल निर्यात और प्रतिबंधों में राहत
अमेरिका ईरानी तेल निर्यात, बैंकिंग, बीमा और शिपिंग से जुड़े प्रतिबंधों में राहत देने की प्रक्रिया शुरू करेगा। साथ ही आर्थिक प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से हटाने का भी प्रस्ताव है।
अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान
- ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियों को जारी करने पर सहमति।
- दोनों देश एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेंगे।
- क्षेत्रीय सैन्य संघर्षों को समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है।
- समझौते के पालन की निगरानी के लिए संयुक्त तंत्र बनाया जाएगा।
- 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने का लक्ष्य तय किया गया है।
- अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की मंजूरी दिलाने की योजना है।
अभी भी कई सवाल बाकी
मसौदे में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अंतिम स्पष्टता नहीं है। इनमें ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम भंडार का भविष्य, परमाणु सुविधाओं की स्थिति, भविष्य में यूरेनियम संवर्धन की अनुमति और दीर्घकालिक निगरानी व्यवस्था जैसे प्रश्न शामिल हैं।