लेबनान में इजराइली हमलों के बाद ईरान ने एक बार फिर होर्मुज स्ट्रेट बंद करने का ऐलान किया है। इस फैसले से वैश्विक तेल बाजार और पश्चिम एशिया की स्थिरता को लेकर नई चिंताएं बढ़ गई हैं।
पश्चिम एशिया में हालात एक बार फिर तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं। लेबनान में ताजा इजराइली हमलों के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा बंद करने का फैसला लेकर क्षेत्रीय तनाव को नई दिशा दे दी है। कुछ दिन पहले ही अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते को संभावित राहत के तौर पर देखा जा रहा था, लेकिन जमीन पर बदलते घटनाक्रमों ने उस उम्मीद को झटका दिया है।
अब संघर्ष केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ सकता है। इजराइल और लेबनान के बीच घोषित युद्धविराम के टूटने के बाद हालात और अधिक जटिल हो गए हैं। ऐसे में ईरान का यह फैसला पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सीजफायर टूटते ही बदला ईरान का रुख
ईरान की संयुक्त सैन्य कमान ने सरकारी प्रसारण के जरिए घोषणा की कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से बंद किया जा रहा है। ईरानी पक्ष का दावा है कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते की पहली शर्त लेबनान में सैन्य कार्रवाई रोकना थी, लेकिन दक्षिणी लेबनान में हमले जारी रहे। इसी वजह से तेहरान ने कड़ा रुख अपनाने का फैसला किया।
16 मौतों के बाद बढ़ा क्षेत्रीय तनाव
रिपोर्ट्स के अनुसार युद्धविराम लागू होने के कुछ घंटों बाद ही दक्षिणी लेबनान के नबातियेह क्षेत्र में हमले हुए, जिनमें कम से कम 16 लोगों की मौत हुई। इस घटना ने संघर्ष विराम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए। क्षेत्रीय विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसी घटनाएं शांति प्रयासों को कमजोर करती हैं और नए टकराव की आशंका बढ़ाती हैं।
नेतन्याहू ने जारी रखे सख्त संकेत
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार सुरक्षा के मुद्दे पर किसी तरह की नरमी नहीं बरतेगी। उन्होंने कहा कि गाजा और लेबनान में सैन्य अभियान जारी रहेंगे। इस बयान को क्षेत्र में लंबे समय तक तनाव बने रहने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है असर
होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। खाड़ी देशों से होने वाला बड़ा ऊर्जा निर्यात इसी रास्ते से दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचता है। ऐसे में इस मार्ग पर किसी भी प्रकार की रोक का असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों, शिपिंग लागत और वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है। ऊर्जा आयात पर निर्भर देशों की चिंता भी इसी वजह से बढ़ गई है।
बातचीत के दरवाजे अभी पूरी तरह बंद नहीं
तनाव के बावजूद कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। ईरान का प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के साथ आगे की वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड जाने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर सकते हैं। इससे संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष अभी संवाद की संभावना को पूरी तरह खत्म नहीं करना चाहते।
स्विट्जरलैंड में जुटे राजनयिक
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हालात को संभालने की कोशिशें तेज हो गई हैं। स्विट्जरलैंड में कई देशों के राजनयिक आगे की संभावित वार्ताओं की रूपरेखा तैयार करने में जुटे हैं। इन बैठकों का मकसद क्षेत्रीय संघर्ष को और बढ़ने से रोकना तथा अमेरिका-ईरान संवाद को जीवित रखना बताया जा रहा है। होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का फैसला केवल एक सैन्य या राजनीतिक संदेश नहीं है। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया की स्थिरता से जुड़ा ऐसा कदम है, जिसके प्रभाव आने वाले दिनों में दुनिया भर में महसूस किए जा सकते हैं।