पश्चिम बंगाल की बीजेपी सरकार ने अपने पहले पूर्ण बजट में एक लाख सरकारी नौकरियों, 33% महिला आरक्षण, डीए बढ़ोतरी और कई नई योजनाओं का ऐलान किया है। बजट को रोजगार, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक कल्याण पर केंद
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में बीजेपी सरकार ने अपना पहला पूर्ण बजट पेश करते हुए रोजगार, महिला सशक्तिकरण और कर्मचारी हितों पर बड़ा फोकस दिखाया है। बजट में एक लाख सरकारी पद भरने, महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण और सरकारी कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में बड़ी बढ़ोतरी जैसे फैसले शामिल हैं। इन घोषणाओं को सरकार के राजनीतिक और प्रशासनिक रोडमैप के तौर पर भी देखा जा रहा है।
विधानसभा में पेश किए गए वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए हैं, जिनका सीधा असर युवाओं, महिलाओं, कर्मचारियों और सामाजिक समूहों पर पड़ सकता है। खास बात यह है कि यह बजट ऐसे समय आया है जब रोजगार और सामाजिक कल्याण राज्य की राजनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।
एक लाख सरकारी नौकरियों का रोडमैप
बजट की सबसे बड़ी घोषणा एक लाख सरकारी पदों पर भर्ती की रही। सरकार ने साफ किया है कि इन पदों में 33 प्रतिशत महिलाओं के लिए आरक्षण रहेगा। भर्ती अभियान के तहत 50 हजार शिक्षकों और 20 हजार पुलिस कर्मियों के खाली पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जाएगा। इससे लंबे समय से भर्ती का इंतजार कर रहे युवाओं को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
कर्मचारियों को डीए और वेतन में राहत
सरकारी कर्मचारियों के लिए भी बजट में बड़ा ऐलान किया गया। महंगाई भत्ता 18 प्रतिशत से बढ़ाकर 34 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं होमगार्ड, ग्रीन पुलिस और सिविक पुलिस कर्मियों के मासिक वेतन में एक हजार रुपये की वृद्धि की घोषणा की गई है। सरकार का मानना है कि इससे निचले स्तर के कर्मचारियों को आर्थिक राहत मिलेगी।
महिलाओं के लिए अलग फोकस
बजट में महिला सशक्तिकरण को प्रमुख स्थान दिया गया है। अन्नपूर्णा योजना के लिए 36 हजार करोड़ रुपये के आवंटन की घोषणा की गई है। इसके अलावा महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा जारी रखने हेतु 550 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। राज्य के हर थाने में महिला पुलिसकर्मी और प्रत्येक सब-डिविजन में महिला पुलिस स्टेशन स्थापित करने की योजना भी पेश की गई है।
पत्रकारों और विशेष वर्गों के लिए नई योजनाएं
सरकार ने सेवानिवृत्त पत्रकारों के लिए प्रतिमाह पांच हजार रुपये पेंशन देने की घोषणा की है। वहीं राजनीतिक कारणों से जेल जा चुके लोगों को दस हजार रुपये मासिक पेंशन देने का भी प्रावधान किया गया है। इन घोषणाओं को सामाजिक सुरक्षा दायरे के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है।
सांस्कृतिक और वैचारिक पहचान पर जोर
बजट में केवल आर्थिक योजनाओं पर ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक परियोजनाओं पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित करने, उनकी विरासत से जुड़े पुस्तकालय और शोध केंद्र के लिए 200 करोड़ रुपये आवंटित करने की घोषणा की गई है। साथ ही टैगोर सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना का भी प्रस्ताव रखा गया है।
धार्मिक पर्यटन और बुनियादी ढांचे पर निवेश
राज्य सरकार ने धार्मिक पर्यटन को नई पहचान देने के लिए बंगाल शक्तिपीठ सर्किट विकसित करने की योजना का ऐलान किया है। कालीघाट, तारापीठ और कंकालितला जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास के लिए विरासत आयोग गठित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे पर्यटन, स्थानीय रोजगार और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
राजनीतिक संदेश भी छिपा है बजट में
विश्लेषकों का मानना है कि यह बजट केवल वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि बीजेपी सरकार की राजनीतिक प्राथमिकताओं का भी संकेत है। रोजगार, महिला कल्याण, सांस्कृतिक विरासत और कर्मचारी हितों को एक साथ साधने की कोशिश से सरकार ने विभिन्न सामाजिक वर्गों तक अपना संदेश पहुंचाने का प्रयास किया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन घोषणाओं को जमीन पर कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।