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Videocon ED Case: $2.03B Scam Exposed

2.03 बिलियन डॉलर का खेल! वीडियोकॉन केस में ED का बड़ा खुलासा, विदेशी नेटवर्क से हुई मनी लॉन्ड्रिंग

वीडियोकॉन केस में ED ने 2.03 बिलियन डॉलर के गबन और मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा किया। विदेशी कंपनियों के नेटवर्क से पैसे ट्रांसफर करने के आरोप, जानें पूरा मामला।


203 बिलियन डॉलर का खेल वीडियोकॉन केस में ed का बड़ा खुलासा विदेशी नेटवर्क से हुई मनी लॉन्ड्रिंग

दिल्ली से आई एक बड़ी खबर ने कॉरपोरेट जगत में हलचल मचा दी है। कभी इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट का बड़ा नाम रहा वीडियोकॉन, अब फिर सुर्खियों में है… इस बार वजह है अरबों डॉलर के कथित गबन और मनी लॉन्ड्रिंग का मामला। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने जो खुलासा किया है, वो सिर्फ एक कंपनी नहीं बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।

ED की जांच में बड़ा खुलासा

प्रवर्तन निदेशालय यानी Enforcement Directorate ने इस मामले में नई पूरक चार्जशीट दाखिल की है। इसमें वीडियोकॉन ग्रुप के संस्थापक Venugopal Dhoot और कई अन्य लोगों पर 2.03 बिलियन अमेरिकी डॉलर के गबन का आरोप लगाया गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि यह कोई साधारण वित्तीय गड़बड़ी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के जरिए पैसे को इधर-उधर किया गया। थोड़ा साफ शब्दों में कहें तो… पैसा भारत से बाहर भेजा गया, कई कंपनियों के जरिए घुमाया गया, और फिर उसकी असली ट्रैकिंग मुश्किल बना दी गई।

कैसे रचा गया पूरा खेल

विदेशी कंपनियों का जाल

ED के मुताबिक, वीडियोकॉन ग्रुप की सहायक कंपनी ने विदेशी तेल-गैस प्रोजेक्ट्स के नाम पर भारी फंड जुटाया। लेकिन जांच में सामने आया कि इस पैसे का बड़ा हिस्सा असल प्रोजेक्ट्स में नहीं गया। इसके बजाय, इसे अलग-अलग देशों की कंपनियों में ट्रांसफर किया गया। यह पूरा मामला Central Bureau of Investigation की FIR के आधार पर शुरू हुआ था, जिसमें शुरुआती गड़बड़ियों के संकेत मिले थे। 

बिना एग्रीमेंट दिए गए करोड़ों

जांच में एक दिलचस्प, और थोड़ा चौंकाने वाला पहलू भी सामने आया। बताया गया कि 2008 के आसपास, कुछ कंपनियों को बिना किसी औपचारिक लोन एग्रीमेंट के करोड़ों रुपये दिए गए। बाद में जल्दबाजी में कागजी समझौते तैयार किए गए, ताकि रिकॉर्ड ठीक दिखे। 

विदेशी कनेक्शन: सचिन दुग्गल की भूमिका

इस पूरे मामले में UK बेस्ड कारोबारी Sachin Dev Duggal का नाम भी सामने आया है। ED का दावा है कि वे इस नेटवर्क के मुख्य लाभार्थियों में से एक हो सकते हैं। उनकी कंपनियों में निवेश, फिर वही पैसा दूसरे रास्तों से लौटना… यह पैटर्न जांच एजेंसी के शक को मजबूत करता है।

पैसे का फ्लो: उलझी हुई कहानी

पांच कंपनियों के जरिए ट्रांसफर

2011 से 2014 के बीच, लगभग 20 करोड़ रुपये अलग-अलग विदेशी संस्थाओं के जरिए ट्रांसफर किए गए। कागजों में ये निवेश और बिजनेस डील्स दिखती हैं, लेकिन जांच एजेंसी मानती है कि असल मकसद पैसा छुपाना था।

घाटे में कंपनी में भारी निवेश?

ED ने एक और सवाल उठाया है जिस कंपनी में निवेश किया गया, वो उस समय घाटे में थी। फिर भी उसमें लाखों फ्रैंक (विदेशी मुद्रा) का निवेश क्यों किया गया…? यही वो सवाल है, जो पूरे केस को और संदिग्ध बनाता है। 

कोर्ट में मामला, आगे क्या?

दिल्ली के विशेष PMLA कोर्ट ने इस केस में संज्ञान ले लिया है। अब आगे की सुनवाई में यह साफ होगा कि क्या आरोप साबित होते हैं, किन लोगों की भूमिका कितनी गंभीर है और क्या रिकवरी संभव है

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