शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 सांसदों की बगावत की चर्चा तेज। संजय राउत का बड़ा हमला, संजय राउत का फूटा गुस्सा, बोले- ‘बेईमानी इनके खून में’ उद्धव ठाकरे ने बुलाई आपात बैठक।
मुंबई । महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आता दिखाई दे रहा है। सूत्रों के मुताबिक, Uddhav Thackeray की अगुआई वाली शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत का रास्ता चुन लिया है। बताया जा रहा है कि इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष Om Birla को पत्र भेजकर Eknath Shinde गुट की शिवसेना में विलय की इच्छा जताई है। अगर यह दावा सही साबित होता है, तो जून 2022 में 39 विधायकों की बगावत के बाद उद्धव ठाकरे के लिए यह दूसरा बड़ा राजनीतिक झटका होगा। (इन दावों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।)
राउत का फूटा गुस्सा, प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीखी टिप्पणी
शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद Sanjay Raut ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने सांसदों को लेकर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया और उन्हें "बेईमान" बताया। बाद में सफाई देते हुए राउत ने कहा कि मराठी भाषा में ऐसे शब्द आम बोलचाल का हिस्सा हैं।
'50-50 करोड़ के ऑफर' का दावा
राउत ने आरोप लगाया कि बागी सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए बड़े आर्थिक प्रलोभन दिए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि कुछ सांसदों तक करोड़ों रुपए पहुंचाए गए और उन्हें चार्टर्ड विमानों से दिल्ली लाया गया। हालांकि इन आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक प्रमाण पेश नहीं किया गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सिर्फ 3 सांसद पहुंचे
दिल्ली में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से केवल तीन सांसद मौजूद रहे। इनमें अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और अरविंद सावंत शामिल थे। बाकी सांसदों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी है।
उद्धव ठाकरे ने बुलाई आपात बैठक
सूत्रों के अनुसार उद्धव ठाकरे और पार्टी नेतृत्व बागी सांसदों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं। इसी बीच पार्टी ने 18 जून को दिल्ली में संसदीय समिति की बैठक बुलाई है। बताया जा रहा है कि सभी सांसदों को बैठक में उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। अनुपस्थित रहने वाले सांसदों के खिलाफ पार्टी कार्रवाई पर विचार कर सकती है।
चार साल पहले भी हुआ था बड़ा विभाजन
जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायक शिवसेना से अलग हो गए थे। उस बगावत के बाद उद्धव ठाकरे सरकार गिर गई थी और बाद में शिंदे गुट को चुनाव आयोग से शिवसेना का नाम और धनुष-बाण चुनाव चिन्ह भी मिल गया था। अब सांसदों की संभावित बगावत को उद्धव गुट के लिए एक और बड़े राजनीतिक संकट के रूप में देखा जा रहा है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने क्या कहा?
शिवसेना (यूबीटी) नेता Priyanka Chaturvedi ने कहा कि गाली देना उचित नहीं है, लेकिन राउत की भावनाओं को समझा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता ने सांसदों को नहीं, बल्कि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व पर भरोसा करके वोट दिया था। यदि किसी सांसद का पार्टी से विश्वास उठ गया है तो उसे पहले इस्तीफा देना चाहिए।