तमिलनाडु के तिरुवल्लूर में एक सीफूड एक्सपोर्ट यूनिट में अमोनिया गैस लीक होने से दो कर्मचारियों की मौत हो गई। दर्जनों लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि राज्य सरकार ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं।
तमिलनाडु के तिरुवल्लूर जिले में एक सीफूड एक्सपोर्ट यूनिट में हुई अमोनिया गैस लीकेज की घटना ने औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फैक्ट्री परिसर में अचानक फैली गैस के कारण कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग मौके पर ही बीमार पड़ गए।
घटना में दो कर्मचारियों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 46 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रभावित कर्मचारियों में बड़ी संख्या उत्तर भारत से आए प्रवासी श्रमिकों की बताई जा रही है, जो यूनिट परिसर में ही रह रहे थे। शुरुआती जांच में गैस रिसाव की वजह एक मेजरमेंट वॉल्व में तकनीकी खराबी मानी जा रही है।
गैस फैलते ही बिगड़ी कर्मचारियों की तबीयत
प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार गैस रिसाव के बाद कर्मचारियों को सांस लेने में दिक्कत, चक्कर और उल्टी जैसी समस्याएं होने लगीं। कुछ ही देर में कई लोगों की हालत इतनी खराब हो गई कि उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाना पड़ा। फैक्ट्री के भीतर मौजूद श्रमिकों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ा क्योंकि वे सीधे गैस के संपर्क में आए थे।
सात कर्मचारियों की हालत अब भी गंभीर
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि भर्ती किए गए लोगों में सात कर्मचारियों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। सभी को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज जारी है। जिन मरीजों की हालत ज्यादा गंभीर है, उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के लिए चेन्नई के स्टेनली मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर करने की तैयारी की जा रही है।
प्रवासी मजदूरों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर
घटना में प्रभावित अधिकांश कर्मचारी उत्तर भारतीय प्रवासी श्रमिक हैं। ये मजदूर यूनिट में काम करने के साथ वहीं रह भी रहे थे। ऐसे में गैस रिसाव का सीधा असर उन पर पड़ा। यह पहलू औद्योगिक इकाइयों में श्रमिक आवास और सुरक्षा मानकों को लेकर भी नई बहस पैदा कर रहा है, क्योंकि किसी आपात स्थिति में श्रमिकों के लिए सुरक्षित निकासी व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है।
सरकार ने बनाई उच्चस्तरीय जांच समिति
घटना के बाद राज्य सरकार ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने तीन सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश दिया है। समिति में औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव और सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त निदेशक को शामिल किया गया है। समिति को 24 घंटे के भीतर अंतरिम रिपोर्ट और तीन दिनों के अंदर विस्तृत अंतिम रिपोर्ट सौंपनी होगी।
सुरक्षा मानकों पर उठे नए सवाल
यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। अमोनिया जैसी गैस का उपयोग कई खाद्य प्रसंस्करण और कोल्ड स्टोरेज इकाइयों में किया जाता है, लेकिन इसके रिसाव की स्थिति बेहद खतरनाक हो सकती है। अब जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि तकनीकी चूक, रखरखाव में लापरवाही या सुरक्षा प्रोटोकॉल की किसी कमी ने इस हादसे को जन्म दिया।