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Supreme Court Refuses Stay On CBSE Three Language

CBSE तीन-भाषा नीति पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, 14 जुलाई को होगी अहम सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने CBSE की तीन-भाषा नीति पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कक्षा 9 में लागू होने वाली नई भाषा नीति पर अब 14 जुलाई को सुनवाई होगी।


cbse तीन-भाषा नीति पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार 14 जुलाई को होगी अहम सुनवाई

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई की नई तीन-भाषा नीति पर तत्काल रोक लगाने की मांग खारिज कर दी है। कक्षा 9 से लागू होने वाली इस नीति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने किसी भी तरह की अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया और मामले को 14 जुलाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। इस फैसले के साथ फिलहाल सीबीएसई की नई भाषा नीति के क्रियान्वयन का रास्ता साफ हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाने से किया इनकार

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर पहले भी विस्तृत बहस हो चुकी है, इसलिए फिलहाल अंतरिम रोक का आदेश देने का कोई आधार नहीं बनता। अदालत ने मामले को पहले से लंबित समान याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है।

एनजीओ ने लागू करने के तरीके पर उठाए सवाल

यह याचिका Friends of People for Active Democracy नामक संस्था की ओर से दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि वह तीन-भाषा नीति का विरोध नहीं कर रहा, बल्कि इसके क्रियान्वयन की प्रक्रिया और व्यावहारिक चुनौतियों पर सवाल उठा रहा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने संस्था के नाम को लेकर हल्की टिप्पणी भी की, जिस पर याचिकाकर्ता पक्ष ने स्पष्ट किया कि यह 2013 में स्थापित एक पंजीकृत ट्रस्ट है।

14 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को 14 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। इससे पहले अदालत केंद्र सरकार, सीबीएसई और एनसीईआरटी को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दे चुकी है। अदालत ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा था कि नई नीति लागू करने को लेकर सीबीएसई की तैयारियां किस स्तर पर हैं।

क्या है सीबीएसई की नई तीन-भाषा नीति?

सीबीएसई के नए सर्कुलर के अनुसार 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होगा। नई व्यवस्था के तहत छात्रों को कुल तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होना जरूरी होगा। विदेशी भाषा केवल तीसरी भाषा या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में चुनी जा सकेगी।   यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE 2023) के अनुरूप लागू की जा रही है।

कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा का पेपर नहीं

छात्रों पर अतिरिक्त दबाव कम करने के लिए सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि तीसरी भाषा (R3) का अलग बोर्ड पेपर नहीं होगा।

मूल्यांकन कैसे होगा?

  • R3 विषय का मूल्यांकन स्कूल स्तर पर किया जाएगा।
  • प्राप्तांक सीबीएसई प्रमाणपत्र में दर्ज होंगे।
  • केवल R3 विषय के कारण किसी छात्र को बोर्ड परीक्षा से वंचित नहीं किया जाएगा।

भाषा शिक्षक नहीं होने पर क्या होगा?

सीबीएसई ने स्कूलों को कई वैकल्पिक व्यवस्थाओं की अनुमति दी है

  • अन्य विषयों के भाषा-ज्ञान रखने वाले शिक्षकों की सेवाएं
  • इंटर-स्कूल संसाधन साझा करना
  • ऑनलाइन और हाइब्रिड शिक्षण
  • सेवानिवृत्त भाषा शिक्षकों की नियुक्ति
  • योग्य स्नातकोत्तर अभ्यर्थियों की सेवाएं लेना

दिव्यांग और विदेशी छात्रों को मिलेगी छूट

बोर्ड के अनुसार दिव्यांग विद्यार्थियों (CWSN) को कानून के तहत आवश्यक छूट दी जाएगी। विदेश से भारत लौटने वाले छात्रों को विशेष परिस्थितियों में दो भारतीय भाषाओं की अनिवार्यता से राहत मिल सकती है।

गणित और विज्ञान में भी लागू होगी दो-स्तरीय प्रणाली

सीबीएसई ने 2026-27 सत्र से कक्षा 9 में गणित और विज्ञान विषयों के लिए भी टू-लेवल सिस्टम लागू करने की घोषणा की है। इसके तहत एक स्टैंडर्ड स्तर, एक एडवांस्ड स्तर उपलब्ध होगा। सभी छात्र सामान्य परीक्षा देंगे, जबकि इच्छुक विद्यार्थी अतिरिक्त एडवांस्ड पेपर देकर अपनी उच्च स्तर की विषय दक्षता प्रदर्शित कर सकेंगे।

शिक्षा जगत में बढ़ी बहस

तीन-भाषा नीति को लेकर देशभर में बहस जारी है। समर्थकों का कहना है कि इससे भारतीय भाषाओं को बढ़ावा मिलेगा और छात्रों की भाषाई क्षमता मजबूत होगी। वहीं आलोचक कई राज्यों में भाषा विकल्प, शिक्षकों की उपलब्धता और व्यावहारिक क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बाद इस नीति की दिशा और स्पष्ट हो सकती है।

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