हरियाणा के राखीगढ़ी में मिले कंकालों का वैज्ञानिक अध्ययन होगा, जिससे हड़प्पा सभ्यता के जीवन, स्वास्थ्य और प्रवास की जानकारी मिल सकेगी।
हरियाणा के राखीगढ़ी पुरातात्विक स्थल से प्राप्त मानव कंकाल अवशेषों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने वैज्ञानिक अध्ययन के लिए भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण (एएनएसआई) को सौंप दिया है।
भारतीय मानव विज्ञान सर्वेक्षण के निदेशक प्रोफेसर बी.वी. शर्मा ने सोमवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि एएसआई और एएनएसआई के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत यह कदम उठाया गया है, जिससे सिंधु-सरस्वती सभ्यता पर बहुविषयक अनुसंधान को नई गति मिलेगी। अवशेषों पर प्राचीन डीएनए सहित विभिन्न आधुनिक तकनीकों से अध्ययन किया जाएगा।उन्होंने बताया कि 2025-26 के उत्खनन सत्र के दौरान राखीगढ़ी के टीला संख्या-7 में आठ कब्रें मिली थीं। इनमें तीन पूर्ण मानव कंकाल तथा अन्य अस्थि अवशेष प्राप्त हुए, जिन्हें विस्तृत जांच के लिए कोलकाता स्थित एएनएसआई की प्रयोगशाला भेजा गया है।वैज्ञानिकों के अनुसार, प्राचीन डीएनए, समस्थानिक और अस्थिविज्ञान संबंधी अध्ययनों से हड़प्पा काल के लोगों की उत्पत्ति, स्वास्थ्य, जीवनशैली और प्रवास संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां मिल सकेंगी।
राखीगढ़ी क्षेत्र का फैलाव सबसे ज्यादा
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संयुक्त महानिदेशक डॉ. संजय मंजुल ने कहा कि भारतीय उपमहाद्वीप में सिंधु और सरस्वती नदी के किनारे जो सभ्यता विकसित हुई, उसे सिंधु घाटी या हड़प्पा सभ्यता के नाम से जाना जाता है।सिंधु नदी के किनारे मिले मोहनजोदड़ो और हड़प्पा सभ्यता के प्रमुख अवशेष वर्तमान में पाकिस्तान में स्थित हैं। वहीं भारत में राखीगढ़ी, बनावली, कालीबंगा, पिंजौर, लोथल और धोलावीरा जैसे स्थलों पर हड़प्पा कालीन अवशेष प्राप्त हुए हैं।इन सभी स्थलों में राखीगढ़ी सबसे विस्तृत पुरातात्विक स्थल है। यहां प्रारंभिक हड़प्पा, विकसित हड़प्पा और उत्तर हड़प्पा काल (लगभग 5000 ईसा पूर्व से 1900 ईसा पूर्व तक) के अवशेष मिले हैं। यह क्षेत्र सरस्वती (वर्तमान घग्गर) नदी की उपधारा दृशद्वती नदी के किनारे बसा हुआ था।अधिकारियों ने बताया कि यह शोध विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से किया जाएगा। इसके निष्कर्ष सिंधु-सरस्वती सभ्यता के जैविक और सांस्कृतिक इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।