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Raghu Rai Passes Away, Legacy Lives On

तस्वीरों का जादूगर नहीं रहा, रघु राय का निधन; कैमरे में कैद इतिहास अमर

प्रख्यात फोटो जर्नलिस्ट रघु राय का निधन। भोपाल गैस त्रासदी समेत ऐतिहासिक तस्वीरों से दुनिया को झकझोरने वाले कलाकार की विरासत हमेशा जिंदा रहेगी।


तस्वीरों का जादूगर नहीं रहा रघु राय का निधन कैमरे में कैद इतिहास अमर

Nation News |

भारत के प्रख्यात फोटो जर्नलिस्ट रघु राय का निधन हो गया है। उनके जाने के साथ ही भारतीय फोटो पत्रकारिता के एक युग का अंत माना जा रहा है। रोशनी और साए के बीच सच को पहचानने वाली उनकी नजर ने दशकों तक देश और दुनिया के महत्वपूर्ण पलों को कैमरे में कैद किया।

भोपाल गैस त्रासदी की तस्वीर बनी पहचान

रघु राय की सबसे चर्चित तस्वीरों में भोपाल गैस त्रासदी के दौरान खींची गई 'Burial of an Unknown Child' शामिल है। यह तस्वीर एक पिता की गोद में मृत बच्चे को दिखाती है और आज भी दुनिया को झकझोरने वाली सबसे प्रभावशाली छवियों में गिनी जाती है। इस एक तस्वीर ने न केवल त्रासदी की भयावहता को सामने रखा, बल्कि फोटो जर्नलिज्म की शक्ति को भी स्थापित किया।

पांच दशकों का समृद्ध करियर

1942 में जन्मे रघु राय ने लगभग पांच दशकों तक फोटोग्राफी के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने बांग्लादेश युद्ध से लेकर भारत के आम जनजीवन तक हर पहलू को अपने कैमरे में उतारा।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और मदर टेरेसा के उनके पोर्ट्रेट आज भी ऐतिहासिक दस्तावेज माने जाते हैं।

अंतरराष्ट्रीय पहचान और मैग्नम फोटोज

रघु राय की प्रतिभा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया। 1972 में पेरिस में आयोजित उनकी प्रदर्शनी ने प्रसिद्ध फोटोग्राफर हेनरी कार्टियर-ब्रेसन का ध्यान आकर्षित किया। बाद में 1977 में उन्हें प्रतिष्ठित Magnum Photos के लिए नामांकित किया गया।

फोटोग्राफी को समाज का आईना माना

रघु राय का मानना था कि तस्वीरें इतिहास को स्थायी रूप देती हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि “इतिहास लिखा और बदला जा सकता है, लेकिन तस्वीरें सच को स्थायी बना देती हैं।”
उनके लिए फोटोग्राफी केवल कला नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने का माध्यम थी।

आधुनिक दौर पर जताई थी चिंता

उन्होंने आधुनिक फोटोग्राफी के बदलते स्वरूप पर भी चिंता जताई थी। उनका कहना था कि आज तस्वीरें सतही और दिखावटी होती जा रही हैं। सोशल मीडिया के दौर में उन्होंने सेल्फी संस्कृति पर भी सवाल उठाए थे।

अंतिम समय तक सक्रिय रहे 

अपने अंतिम दिनों तक रघु राय सामाजिक और राजनीतिक घटनाओं को कैमरे में कैद करते रहे। नागरिकता संशोधन कानून और किसान आंदोलन जैसे विषयों पर उनकी तस्वीरें चर्चा में रहीं। उनके निधन के बाद सोशल मीडिया पर उनकी पुरानी तस्वीरें एक बार फिर वायरल हो रही हैं। रघु राय भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी तस्वीरें आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से जोड़ती रहेंगी।

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