Indian Navy Gets 3 Warships

नेवी को मिले 3 स्वदेशी युद्धपोत, ब्रह्मोस से लैस INS दूनागिरी समेत बढ़ी समुद्री ताकत

भारतीय नौसेना को तीन नए स्वदेशी युद्धपोत मिले हैं। ब्रह्मोस मिसाइल से लैस INS दूनागिरी, लंबी दूरी तक सर्वे करने वाला INS संशोधक और पनडुब्बी रोधी INS अग्रय समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती देंगे।

नेवी को मिले 3 स्वदेशी युद्धपोत, ब्रह्मोस से लैस INS दूनागिरी समेत बढ़ी समुद्री ताकत

Indian Navy induction After Three INS

भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत में एक साथ तीन बड़े इजाफे हुए हैं। INS दूनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय को नौसेना में शामिल कर दिया गया है। खास बात यह है कि तीनों जहाज भारत में डिजाइन और निर्मित किए गए हैं, जिससे रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इन युद्धपोतों की तैनाती ऐसे समय में हुई है जब हिंद महासागर क्षेत्र में रणनीतिक प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। एक जहाज लंबी दूरी तक समुद्री सर्वे करेगा, दूसरा दुश्मन की पनडुब्बियों का शिकार करेगा, जबकि तीसरा ब्रह्मोस जैसी घातक मिसाइलों के साथ समुद्री युद्ध क्षमता को मजबूत बनाएगा।

INS दूनागिरी से बढ़ेगी स्ट्राइक क्षमता

प्रोजेक्ट-17A के तहत तैयार INS दूनागिरी भारतीय नौसेना का पांचवां स्टील्थ फ्रिगेट है। इसकी लंबाई 149 मीटर, वजन 6,670 टन और अधिकतम गति 52 किलोमीटर प्रति घंटा है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी कम रडार पहचान क्षमता है, जिससे यह दुश्मन के रडार पर छोटी नौका जैसा दिखाई देता है। जहाज में 8 ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलें, 32 बराक-8 सरफेस-टू-एयर मिसाइलें, दो ट्रिपल टॉरपीडो लॉन्चर और दो RBU-6000 रॉकेट लॉन्चर लगाए गए हैं। करीब 75 प्रतिशत स्वदेशी उपकरणों और हथियारों से लैस यह युद्धपोत पूर्वी नौसैनिक कमान की ताकत बढ़ाएगा।

INS संशोधक समुद्र का डेटा बैंक बनेगा

INS संशोधक को युद्ध के लिए नहीं बल्कि समुद्री रणनीति और नेविगेशन को मजबूत करने के लिए तैयार किया गया है। 3,300 टन वजन वाला यह जहाज 33 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चल सकता है और बिना रिफ्यूलिंग के करीब 12 हजार किलोमीटर तक यात्रा करने में सक्षम है। इस पर 231 नौसैनिक और वैज्ञानिक एक साथ काम कर सकते हैं। इसका मुख्य कार्य समुद्री मार्गों, बंदरगाहों और गहरे समुद्री क्षेत्रों का हाइड्रोग्राफिक सर्वे करना है। जहाज में CRN-91 नेवल गन, HAL ध्रुव हेलिकॉप्टर संचालन की क्षमता और एडवांस्ड अंडरवॉटर सर्वे सिस्टम मौजूद हैं, जो समुद्र की गहराइयों से महत्वपूर्ण जानकारी जुटाने में मदद करेंगे।

INS अग्रय की नजर दुश्मन पनडुब्बियों पर

अर्नाला क्लास का INS अग्रय उथले समुद्री क्षेत्रों में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए तैयार किया गया है। 900 टन वजन और 46 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति वाला यह युद्धपोत भारतीय तटों के पास दुश्मन की सबमरीन गतिविधियों पर नजर रखेगा। इसमें पारंपरिक प्रोपेलर की जगह वॉटर-जेट सिस्टम लगाया गया है, जिससे इसकी संचालन क्षमता बेहतर होती है। जहाज में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरण लगाए गए हैं। हथियारों में RBU-6000 एंटी-सबमरीन रॉकेट लॉन्चर, दो ट्रिपल टॉरपीडो लॉन्चर, विशेष माइन-लेइंग सिस्टम और हल-माउंटेड तथा लो-फ्रीक्वेंसी वेरिएबल डेप्थ सोनार शामिल हैं, जो पानी के भीतर छिपे खतरों का पता लगाने में मदद करते हैं।

आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को मिला बड़ा संदेश

तीनों जहाजों के नौसेना में शामिल होने के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन को भारत की रणनीतिक ताकत बताया। उन्होंने कहा कि भारत केवल हथियार खरीदने वाला देश बनकर नहीं रहना चाहता, बल्कि रक्षा निर्माण में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। तीनों स्वदेशी युद्धपोतों की तैनाती को इसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की पकड़

इन तीनों जहाजों की भूमिका अलग-अलग है। लेकिन उनका उद्देश्य एक ही है। भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना। INS दूनागिरी समुद्री युद्ध क्षमता बढ़ाएगा। वहीं, INS संशोधक रणनीतिक समुद्री जानकारी जुटाएगा और INS अग्रय तटीय क्षेत्रों में पनडुब्बी खतरों से निपटेगा। विशेषज्ञों के अनुसार इनकी तैनाती से हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की निगरानी, जवाबी कार्रवाई और समुद्री प्रभुत्व की क्षमता और मजबूत होगी।

नौसेना के विस्तार अभियान को मिली नई रफ्तार

भारतीय नौसेना के पास फिलहाल करीब 140 से 145 सक्रिय युद्धपोत हैं और लक्ष्य 2030 तक इस संख्या को 150 से 160 के बीच पहुंचाने का है। ऐसे में INS दूनागिरी, INS संशोधक और INS अग्रय की एंट्री सिर्फ तीन नए जहाजों का शामिल होना नहीं, बल्कि नौसेना के आधुनिकीकरण अभियान का अहम हिस्सा मानी जा रही है। भारत अपने युद्धपोतों को पूर्वी, पश्चिमी और दक्षिणी नौसैनिक कमानों के साथ अंडमान-निकोबार कमान में तैनात करता है। पूर्वी कमान के जहाज बंगाल की खाड़ी और मलक्का स्ट्रेट क्षेत्र में रणनीतिक निगरानी करते हैं, जबकि पश्चिमी कमान अरब सागर में समुद्री सुरक्षा और पाकिस्तान से जुड़े खतरों पर नजर रखती है। अंडमान-निकोबार कमान हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की अग्रिम रक्षा चौकी के रूप में काम करती है।

समुद्र में भी मजबूत हो रही परमाणु प्रतिरोधक क्षमता

भारत की समुद्री शक्ति अब केवल पारंपरिक युद्धपोतों तक सीमित नहीं है। परमाणु क्षमता से लैस पनडुब्बियां भी इसकी रणनीतिक ताकत का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी हैं। खासकर INS अरिहंत जैसी बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां देश की 'सेकेंड स्ट्राइक कैपेसिटी' को मजबूती देती हैं। इसका मतलब है कि किसी संभावित परमाणु हमले के बाद भी भारत जवाबी कार्रवाई करने में सक्षम रहेगा। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार समुद्र आधारित परमाणु क्षमता और आधुनिक युद्धपोतों का यह संयोजन हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति को पहले से अधिक मजबूत बना रहा है।

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