उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के सांसदों को लेकर फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। दिल्ली में हुई एक मुलाकात के बाद सांसदों के संभावित पाला बदलने की चर्चाओं ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई बेचैनी पैदा कर द
मुंबई/दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) चर्चा के केंद्र में है। पार्टी के सांसदों को लेकर उठ रही अटकलों ने नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली में UBT सांसद संजय देशमुख और केंद्रीय मंत्री प्रताप जाधव की मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों की चर्चा शुरू हो गई। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब पार्टी के कुछ सांसदों के शिंदे गुट के संपर्क में होने की बातें लगातार सामने आ रही हैं।
हालांकि अभी तक किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से पाला बदलने का संकेत नहीं दिया है, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
दिल्ली की मुलाकात से बढ़ी राजनीतिक हलचल
यवतमाल-वाशिम से सांसद संजय देशमुख की दिल्ली में केंद्रीय मंत्री प्रताप जाधव से मुलाकात ने चर्चाओं को हवा दे दी। जाधव मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना से जुड़े हैं। इसी वजह से इस मुलाकात को सामान्य राजनीतिक शिष्टाचार से आगे जोड़कर देखा जाने लगा। हालांकि जाधव ने स्पष्ट किया कि बातचीत का संबंध देशमुख की शैक्षणिक संस्था से जुड़े विषयों से था और दोनों के बीच पुरानी व्यक्तिगत मित्रता भी है।
सांसदों की संख्या क्यों बनी अहम
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) के पास लोकसभा में नौ सांसद हैं। पिछले कुछ दिनों से सात सांसदों के संभावित रूप से अलग होने की चर्चाएं चल रही थीं। राजनीतिक समीकरणों के अनुसार यदि छह सांसद एक साथ अलग होते हैं तो वे दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए जरूरी संख्या हासिल कर सकते हैं। यही वजह है कि सांसदों की हर गतिविधि पर राजनीतिक नजर बनी हुई है।
मातोश्री की बैठक ने बढ़ाया सस्पेंस
रविवार को मुंबई स्थित मातोश्री में उद्धव ठाकरे ने पार्टी सांसदों की बैठक बुलाई थी। बैठक में केवल चार सांसद प्रत्यक्ष रूप से मौजूद रहे। पार्टी की ओर से दावा किया गया कि चार अन्य सांसद ऑनलाइन माध्यम से जुड़े थे, जबकि एक सांसद ने फोन पर ठाकरे से बातचीत की। इस उपस्थिति को लेकर विपक्षी खेमों और राजनीतिक पर्यवेक्षकों के बीच अलग-अलग तरह की व्याख्याएं सामने आ रही हैं।
राउत ने अफवाह बताया संकट
राज्यसभा सांसद संजय राउत लगातार यह दावा कर रहे हैं कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है। उनका कहना है कि सांसदों के टूटने की खबरें केवल अफवाह हैं और उद्धव ठाकरे सभी जनप्रतिनिधियों के संपर्क में हैं। राउत का यह बयान ऐसे समय आया है जब पार्टी के भीतर संभावित असंतोष को लेकर चर्चा थमने का नाम नहीं ले रही।
19 जून पर टिकी राजनीतिक नजर
अब निगाहें 19 जून को होने वाले अविभाजित शिवसेना के स्थापना दिवस कार्यक्रम पर हैं। राजनीतिक हलकों में यह देखा जाएगा कि बैठक से दूर रहे सांसद इस कार्यक्रम में शामिल होते हैं या नहीं। राउत ने संकेत दिया है कि शिवसेना परिवार के इस आयोजन में किसी औपचारिक निमंत्रण की जरूरत नहीं होती। ऐसे में कार्यक्रम में मौजूदगी या अनुपस्थिति को राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा जा सकता है।