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मानसून की धीमी प्रगति

13 दिन से थमा मानसून, MP-UP-राजस्थान का इंतजार बढ़ा; देश में 38% कम बारिश ने बढ़ाई चिंता

मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, और राजस्थान में मानसून के पहुंचने में देरी हो रही है, जिससे कृषि और जल संसाधनों को लेकर चिंता बढ़ी है। अल नीनो के संकेत से मौसम विज्ञानियों की चिंता बढ़ी है।


13 दिन से थमा मानसून mp-up-राजस्थान का इंतजार बढ़ा देश में 38 कम बारिश ने बढ़ाई चिंता

AI इमेज |

भोपाल। देशभर में मानसून की रफ्तार एक बार फिर धीमी पड़ गई है। 4 जून को केरलम में दस्तक देने के बाद तेजी से आगे बढ़ा मानसून 8 जून से तेलंगाना के भद्राचलम क्षेत्र में लगभग ठहर गया है। इसका असर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे बड़े राज्यों पर साफ दिखाई दे रहा है, जहां सामान्य तिथियों के मुकाबले मानसून की एंट्री में देरी हो रही है। मौसम विभाग के अनुसार अब इन राज्यों में मानसून 22 जून के बाद ही पहुंचने की संभावना है।

लगातार तीसरे साल जून में लंबा ब्रेक

मानसून ने लगातार तीसरे वर्ष जून के महीने में लंबा ब्रेक लिया है। हालांकि 2024 और 2025 में शुरुआती रुकावट के बावजूद देश में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई थी, लेकिन इस बार स्थिति अलग नजर आ रही है। 17 जून तक देशभर में सामान्य से 37.8 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। ऐसे में कृषि और जल संसाधनों को लेकर चिंता बढ़ने लगी है।

मध्य प्रदेश में 22 से 24 जून के बीच एंट्री के आसार

मध्य प्रदेश में मानसून का इंतजार और लंबा हो गया है। सामान्य तौर पर मानसून 15 से 16 जून तक प्रदेश में पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसकी एंट्री 22 से 24 जून के बीच होने का अनुमान है। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 1 से 17 जून के बीच प्रदेश में औसतन 41.6 मिमी बारिश होती है, जबकि इस बार अब तक करीब 25 मिमी यानी लगभग 1 इंच वर्षा ही दर्ज की गई है।

अल नीनो के संकेतों ने बढ़ाई चिंता

अमेरिकी राष्ट्रीय महासागरीय एवं वायुमंडलीय प्रशासन (NOAA) की रिपोर्ट में अल नीनो जैसी परिस्थितियां बनने के संकेत मिले हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यदि अल नीनो सक्रिय होता है तो कई क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति और असमान बारिश देखने को मिल सकती है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि इंटरट्रॉपिकल कन्वर्जेंस जोन (ITCZ) पर्याप्त गति से सक्रिय नहीं हो पाया है, जिसके कारण मानसूनी हवाओं की प्रगति प्रभावित हुई है।

आठ राज्यों में गर्मी का प्रकोप जारी

मानसून की धीमी रफ्तार का असर तापमान पर भी दिखाई दे रहा है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के कई शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में बुधवार को देश का सर्वाधिक 45 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। वहीं मध्य प्रदेश के खजुराहो में पारा 41.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।

अगले दो दिन बारिश और तेज हवाओं के संकेत

मौसम विभाग ने 19 और 20 जून को मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और विदर्भ के कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई है। साथ ही 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान भी है। बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में भी अच्छी बारिश की संभावना व्यक्त की गई है।

जेट स्ट्रीम कमजोर हुई तो बढ़ेगा मानसून

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की वर्तमान स्थिति जेट स्ट्रीम के पैटर्न से भी प्रभावित हो रही है। यदि ऊपरी वायुमंडल में बहने वाली तेज हवाओं का यह तंत्र कमजोर पड़ता है तो मानसूनी हवाओं को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि अगले 4 से 5 दिनों में महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और मध्य भारत के हिस्सों में मानसून के तेजी से आगे बढ़ने की परिस्थितियां बन सकती हैं।

किसानों को सलाह- जल्दबाजी में न करें बोवनी

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि मानसून की पहली बारिश के बाद तुरंत बोवनी शुरू न करें। विशेषज्ञों का कहना है कि खेतों में कम से कम 4 इंच पानी गिरने के बाद ही बुवाई करना सुरक्षित रहेगा। इससे फसल को पर्याप्त नमी मिलेगी और दोबारा सूखे जैसी स्थिति बनने पर नुकसान की आशंका कम होगी।

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