दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने ISI से जुड़े कथित आतंकी मॉड्यूल के 12 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जांच में पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने और सोशल मीडिया भर्ती नेटवर्क का खुलासा हुआ है।
नई दिल्ली। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े एक बड़े मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से कथित रूप से जुड़े आतंकी मॉड्यूल के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। बुधवार को पांच और आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ दो दिनों में कुल 12 संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक आरोपी अभी भी फरार बताया जा रहा है।
ISI हैंडलर से जुड़े होने का दावा
दिल्ली पुलिस के अनुसार, यह नेटवर्क पाकिस्तान में बैठे कथित ISI हैंडलर शहजाद भट्टी और अजमल गुज्जर से जुड़ा हुआ था। जांच में सामने आया है कि मॉड्यूल के सदस्यों को दिल्ली और आसपास के राज्यों में पुलिसकर्मियों को निशाना बनाने का टास्क दिया गया था। पुलिस का दावा है कि आरोपियों को प्रतिबंधित और कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़े संगठन 'तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान (TTH)' के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी।
पुलिस फोर्स की रेकी के वीडियो भेजे गए
जांच एजेंसियों को आरोपियों के कब्जे से कई संदिग्ध वीडियो मिले हैं। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि इनमें पुलिस बल की गतिविधियों और संवेदनशील स्थानों की रेकी से जुड़े वीडियो शामिल हैं, जिन्हें पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स तक पहुंचाया गया था। इसके अलावा तलाशी के दौरान हथियार, कारतूस और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद की गई है। बरामद सामान की फोरेंसिक और तकनीकी जांच की जा रही है।
सोशल मीडिया के जरिए हो रही थी भर्ती
दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल के अनुसार, मॉड्यूल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं को जोड़ने और प्रभावित करने का प्रयास कर रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि ऑनलाइन माध्यमों के जरिए संपर्क स्थापित कर युवाओं को नेटवर्क में शामिल किया जा रहा था।
पहले 7, अब 5 और आरोपी गिरफ्तार
मंगलवार को सात आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। इनमें मोहित उर्फ योगी, अनस उर्फ अनस त्यागी, दीपक अग्रौला, आरिफ उर्फ प्रधान, करणवीर सिंह, जतन और साबिर के नाम सामने आए थे। बुधवार को पांच अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद कुल गिरफ्तारियों की संख्या 12 हो गई है। वहीं आमिर नामक एक आरोपी अभी भी फरार है, जिसकी तलाश में कई टीमें जुटी हुई हैं।
फंडिंग और विदेशी कनेक्शन की जांच
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों को आर्थिक सहायता कहां से मिल रही थी, उनके विदेशी संपर्क कौन-कौन थे और नेटवर्क का विस्तार किन राज्यों तक फैला हुआ था। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ और डिजिटल साक्ष्यों की जांच के आधार पर आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।