भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में SDPO और पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज होने से केस ने नया मोड़ ले लिया है। परिवार न्यायिक जांच पर सवाल उठा रहा है और कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहा है।
भोजपुर में हुए भरत तिवारी एनकाउंटर का मामला अब केवल एक पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया है। मुठभेड़ के बाद उठे सवालों ने जांच एजेंसियों, प्रशासन और राजनीतिक गलियारों तक हलचल बढ़ा दी है। अब इस मामले में सीधे उन पुलिस अधिकारियों पर ही कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है, जो एनकाउंटर का हिस्सा थे।
घटना के एक सप्ताह बाद मामला और संवेदनशील हो गया है। शाहपुर थाने में जगदीशपुर एसडीओपी, शाहपुर थानाध्यक्ष और एनकाउंटर में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई परिजनों की शिकायत और मुठभेड़ को लेकर उठे विवादों के बीच हुई है।
जांच को मिला नया मोड़
भरत तिवारी की मौत के बाद से ही परिजन और स्थानीय लोग पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा रहे थे। मामले की जांच पहले से विभिन्न स्तरों पर चल रही थी, लेकिन अब संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने से जांच की दिशा बदलती दिखाई दे रही है। इससे पूरे घटनाक्रम की निष्पक्षता और पुलिस के दावों की भी नए सिरे से पड़ताल होगी।
फर्जी एनकाउंटर का आरोप
मृतक के परिवार का दावा है कि भरत तिवारी की मौत वास्तविक मुठभेड़ में नहीं हुई। परिजन लगातार इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि मामले से जुड़े कई तथ्य और परिस्थितियां पहले ही सार्वजनिक हो चुकी हैं, इसलिए केवल जांच की घोषणा पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
न्यायिक जांच पर परिवार को भरोसा नहीं
राज्य सरकार की ओर से न्यायिक जांच के आदेश दिए जाने के बावजूद परिवार संतुष्ट नजर नहीं आ रहा। मृतक के भाई चंदन तिवारी ने साफ कहा है कि उन्हें जांच प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है। परिवार का आरोप है कि कार्रवाई में देरी हो रही है, जबकि जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कदम उठाए जाने चाहिए। इसी नाराजगी के बीच परिवार ने चेतावनी दी है कि न्याय नहीं मिलने पर वे सामूहिक आत्मदाह जैसा कठोर कदम उठा सकते हैं।
मोबाइल फोन को लेकर उठे सवाल
मामले में एक नया विवाद भरत तिवारी के मोबाइल फोन को लेकर भी सामने आया है। उनके पिता काशीनाथ तिवारी का कहना है कि घटना के समय भरत के पास दो मोबाइल फोन थे। इनमें से एक फोन और मोटरसाइकिल परिवार को लौटा दी गई, लेकिन दूसरा निजी मोबाइल अब भी पुलिस के कब्जे में है। परिवार इसे जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हुए मोबाइल की स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहा है।
राजनीतिक और कानूनी दबाव बढ़ा
भरत तिवारी एनकाउंटर केस अब कानूनी जांच से आगे बढ़कर राजनीतिक बहस का विषय भी बन चुका है। मामले में पहले ही निष्पक्ष जांच की मांग उठ चुकी है और सीबीआई जांच को लेकर भी कानूनी पहल की जा रही है। पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज होने के बाद अब जांच एजेंसियों पर तथ्यों को सार्वजनिक करने और जवाबदेही तय करने का दबाव पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और उसके निष्कर्ष इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू होंगे।