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Amit Shah on Delimitation and Southern States Shar

परिसीमन पर भ्रम फैलाया जा रहा, दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ेगी: अमित शाह

अमित शाह ने लोकसभा में परिसीमन और महिला आरक्षण पर विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया। कहा- दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी घटेगी नहीं, बल्कि बढ़ेगी।


परिसीमन पर भ्रम फैलाया जा रहा दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ेगी अमित शाह

नई दिल्ली: लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक पर चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए परिसीमन को लेकर फैल रहे भ्रम को खारिज किया। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों की संसद में हिस्सेदारी घटने की बजाय बढ़ेगी।

दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर सरकार का पक्ष

अमित शाह ने आंकड़ों के साथ स्पष्ट किया कि वर्तमान में लोकसभा में 543 सदस्य हैं, जिनमें दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी लगभग 23.76 प्रतिशत है। प्रस्तावित बदलाव के बाद यह बढ़कर करीब 23.97 प्रतिशत हो जाएगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कर्नाटक की सीटें 28 से बढ़कर 42 हो सकती हैं। आंध्र प्रदेश की सीटें 25 से बढ़कर 38 तक पहुंच सकती हैं। इसी तरह तमिलनाडु और तेलंगाना की हिस्सेदारी में भी हल्की बढ़ोतरी का अनुमान है। उन्होंने कहा कि “दक्षिण के राज्यों को नुकसान होने का नैरेटिव पूरी तरह भ्रामक है।”

महिला आरक्षण और सीटों में बढ़ोतरी का गणित

गृह मंत्री ने कहा कि लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव इसलिए है ताकि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण को प्रभावी तरीके से लागू किया जा सके। उन्होंने बताया कि मौजूदा 543 सीटों में लगभग 50 प्रतिशत वृद्धि कर यह संख्या तय की गई है।

जातीय जनगणना पर सरकार का रुख साफ

अमित शाह ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार जातीय जनगणना कराने के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि जनगणना की प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से चलती है और जब वास्तविक जनगणना होगी, तब जातीय आंकड़े भी जुटाए जाएंगे। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि इस मुद्दे पर भी भ्रम फैलाया जा रहा है।

परिसीमन आयोग पर विपक्ष को जवाब

गृह मंत्री ने कहा कि परिसीमन आयोग की संरचना या प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह वही कानूनी ढांचा है जो पहले से लागू है। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन आयोग की सिफारिशें तब तक लागू नहीं होंगी जब तक संसद उन्हें मंजूरी नहीं देती। साथ ही 2029 तक होने वाले चुनाव वर्तमान व्यवस्था के तहत ही कराए जाएंगे। 

अमित शाह ने लोकतंत्र को लेकर उठे सवालों पर भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि भारत का लोकतंत्र मजबूत है और इसे कोई भी समाप्त नहीं कर सकता। उन्होंने इमरजेंसी का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी लोकतंत्र कायम रहा और जनता ने अपना फैसला सुनाया।

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