मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की कई यूनिवर्सिटीज ने डिग्री, मार्कशीट और आधिकारिक दस्तावेजों में ‘India’ की जगह ‘Bharat’ लिखने का फैसला लिया है। इस बदलाव की शुरुआत जबलपुर से होने जा रही है।
डिग्री और मार्कशीट केवल शैक्षणिक दस्तावेज नहीं होते हैं। वह किसी देश की पहचान भी दिखाते हैं। इसके चलते अब मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की कई यूनिवर्सिटीज ने इसी पहचान से जुड़ा बड़ा फैसला लिया है। इस फैसले के बाद छात्रों को मिलने वाले सर्टिफिकेट्स का स्वरूप बदलने वाला है। इस बदलाव की शुरुआत मध्य प्रदेश के जबलपुर से हो रही है। जहां दीक्षांत समारोह में बांटी जाने वाली डिग्रियों पर ‘India’ की जगह ‘Bharat’ दर्ज होगा। फैसले को सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक संदर्भों से जोड़कर देखा जा रहा है।
शिक्षा जगत में उठाया गया यह कदम केवल शब्दों का बदलाव नहीं माना जा रहा, बल्कि राष्ट्रीय पहचान को लेकर चल रही बहस के बीच एक महत्वपूर्ण संकेत भी माना जा रहा है।
जबलपुर से शुरू होगी नई परंपरा
रानी दुर्गावती यूनिवर्सिटी इस बदलाव को लागू करने वाली पहली यूनिवर्सिटी बनने जा रही है। रविवार को होने वाले दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मौजूदगी में छात्रों को जो डिग्रियां सौंपी जाएंगी, उनमें ‘India’ की जगह ‘Bharat’ लिखा होगा। इससे इस पहल को राष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष महत्व मिल गया है।
अब हर आधिकारिक दस्तावेज में दिखेगा ‘Bharat’
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि बदलाव केवल डिग्री और मार्कशीट तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में सभी आधिकारिक पत्राचार, निमंत्रण पत्र, प्रशासनिक दस्तावेज और कैंपस के साइनबोर्ड्स में भी ‘Bharat’ शब्द का इस्तेमाल किया जाएगा। यानी संस्थान की पूरी प्रशासनिक पहचान एक समान रूप में दिखाई देगी।
क्या है यूनिवर्सिटी का तर्क
कुलपति राजेश कुमार वर्मा का कहना है कि देश का मूल और ऐतिहासिक नाम ‘भारत’ है। उनके मुताबिक जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी ‘Bharat’ शब्द का उपयोग हो चुका है, तो शैक्षणिक संस्थानों में इसे अपनाने में कोई संकोच नहीं होना चाहिए। इसी सोच के आधार पर यूनिवर्सिटी की कार्यकारी परिषद ने प्रस्ताव पारित कर बदलाव को मंजूरी दी है।
दूसरी यूनिवर्सिटीज भी तैयार
जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की कई अन्य सरकारी और केंद्रीय यूनिवर्सिटीज भी इसी दिशा में कदम बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। यदि यह प्रक्रिया व्यापक स्तर पर लागू होती है तो आने वाले वर्षों में लाखों छात्रों की डिग्रियों और शैक्षणिक दस्तावेजों पर ‘Bharat’ दर्ज दिखाई दे सकता है।
पहचान की बहस के बीच आया फैसला
यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है जब देश की आधिकारिक और सांस्कृतिक पहचान को लेकर चर्चा लगातार होती रही है। समर्थक इसे भारतीय परंपरा और इतिहास से जुड़ाव का प्रतीक मान रहे हैं, जबकि शिक्षा क्षेत्र में इसके व्यापक प्रभाव और अन्य संस्थानों की प्रतिक्रिया पर भी नजर बनी हुई है। फिलहाल इतना तय है कि इस पहल ने शिक्षा जगत में नई बहस को जन्म दे दिया है।