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ED Raid on Rajesh Exports

राजेश एक्सपोर्ट्स पर ED का शिकंजा, सोना स्टॉक और विदेशी लेनदेन में बड़े सवाल

राजेश एक्सपोर्ट्स के 9 ठिकानों पर ED की छापेमारी में सोना स्टॉक, विदेशी निवेश और करोड़ों रुपये के लेनदेन को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। सेबी की कार्रवाई के बाद जांच और तेज हो गई है।


राजेश एक्सपोर्ट्स पर ed का शिकंजा सोना स्टॉक और विदेशी लेनदेन में बड़े सवाल

Crime News |

देश के जेम्स और ज्वेलरी कारोबार की एक बड़ी कंपनी इन दिनों कई एजेंसियों की जांच के दायरे में है। मामला सिर्फ कारोबारी अनियमितताओं तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि विदेशी लेनदेन, सोने के स्टॉक और निवेशकों को दी गई वित्तीय जानकारी की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

इसी कड़ी में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर्स से जुड़े मुंबई और बेंगलुरु स्थित 9 परिसरों पर छापेमारी की है। जांच FEMA के तहत की जा रही है। इससे पहले सेबी भी कंपनी और उसके चेयरमैन के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर चुकी है, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।

स्टॉक रिकॉर्ड और जमीन की हकीकत में फर्क

जांच के दौरान ED को कंपनी के रिकॉर्ड और वास्तविक सोना भंडार के बीच बड़ा अंतर मिला है। एजेंसी के मुताबिक खातों में दर्ज सोने की मात्रा की तुलना में मौके पर मौजूद भौतिक स्टॉक करीब 40 प्रतिशत कम पाया गया। किसी भी बुलियन और ज्वेलरी कंपनी के लिए यह अंतर सामान्य नहीं माना जाता, इसलिए जांच का फोकस अब स्टॉक रिपोर्टिंग और इन्वेंट्री मैनेजमेंट पर भी है।

विदेश भेजे गए 190 करोड़ पर सवाल

जांच एजेंसियों को संदेह है कि शेयरों के लेनदेन और कथित बेनामी नेटवर्क के जरिए करीब 20 मिलियन डॉलर यानी लगभग 190 करोड़ रुपए देश से बाहर भेजे गए। ED यह पता लगाने में जुटी है कि इन ट्रांजेक्शंस का वास्तविक कारोबारी उद्देश्य क्या था और क्या विदेशी मुद्रा नियमों का उल्लंघन हुआ।

3000 करोड़ के इंपोर्ट दावे की पड़ताल

एजेंसी उन दस्तावेजों की भी जांच कर रही है जिनमें कंपनी ने करीब 3,000 करोड़ रुपए के कर्ज निपटान के लिए सोना आयात करने का दावा किया था। ED को आशंका है कि कुछ लेनदेन केवल दस्तावेजों तक सीमित हो सकते हैं। यदि जांच में यह संदेह सही साबित होता है तो मामला केवल FEMA तक सीमित न रहकर अन्य आर्थिक अपराधों की दिशा में भी बढ़ सकता है।

अफ्रीकी खदानों में निवेश पर बढ़ी निगरानी

जांच का एक अहम पहलू अफ्रीका की सोना खदानों में कथित निवेश है। ED के अनुसार कंपनी ने 1,000 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया, लेकिन इसकी जानकारी संबंधित सहायक कंपनियों के खातों में दर्ज नहीं दिखाई दी। वित्तीय विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी बड़े विदेशी निवेश का खुलासा नियामकीय दस्तावेजों में नहीं किया जाता, तो यह कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन सकता है।

सेबी की कार्रवाई से बढ़ा दबाव

मार्केट रेगुलेटर सेबी पहले ही राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके चेयरमैन पर कार्रवाई कर चुका है। सेबी का आरोप है कि वित्तीय वर्षों 2021 से 2025 के बीच कंपनी ने अपनी आय को वास्तविक स्थिति से कहीं अधिक दिखाया। नियामक के अनुसार विदेशी सहायक कंपनी के नाम पर दिखाई गई बड़ी आय का समर्थन ऑडिट रिकॉर्ड में पर्याप्त रूप से नहीं मिला। यही वजह है कि कंपनी के वित्तीय खुलासों की विश्वसनीयता अब जांच के केंद्र में है।

निवेशकों की नजर अगली कार्रवाई पर

राजेश एक्सपोर्ट्स के खिलाफ चल रही जांच अब केवल एक कंपनी का मामला नहीं रह गई है। यह कॉर्पोरेट पारदर्शिता, विदेशी निवेश खुलासे और शेयर बाजार में निवेशकों के भरोसे से भी जुड़ गया है। ED और सेबी की आगे की कार्रवाई यह तय करेगी कि मामला नियामकीय उल्लंघन तक सीमित रहता है या फिर बड़े आर्थिक अपराध के रूप में सामने आता है।

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