एप स्टोर विवाद में Apple ने भारत के प्रतिस्पर्धा आयोग CCI के साथ सहयोग करने का फैसला किया है। कंपनी वित्तीय आंकड़े साझा करेगी, जिससे जांच में नया मोड़ आ सकता है।
भारत में एंटीट्रस्ट जांच का सामना कर रही अमेरिकी टेक दिग्गज Apple ने आखिरकार भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के साथ सहयोग करने का फैसला कर लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी अब अपने वित्तीय आंकड़े जांच एजेंसी के साथ साझा करने के लिए तैयार हो गई है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब Apple पर एप स्टोर से जुड़े कथित प्रतिस्पर्धा-विरोधी व्यवहार की जांच चल रही है।
क्या है पूरा मामला?
Apple पर आरोप है कि वह अपने App Store के जरिए डेवलपर्स पर कुछ ऐसी शर्तें लागू करती है, जो प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकती हैं। इसी मामले में CCI जांच कर रहा है और कंपनी से राजस्व तथा वित्तीय आंकड़ों की मांग की गई थी। हालांकि, Apple लंबे समय से इन जानकारियों को साझा करने को लेकर आपत्ति जता रही थी। अब कंपनी ने जांच प्रक्रिया में सहयोग करने और आवश्यक आंकड़े उपलब्ध कराने का संकेत दिया है।
25 जून तक मांगी गई जानकारी
रिपोर्ट्स के अनुसार, CCI ने Apple को वित्तीय विवरण और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने के लिए 25 जून तक का समय दिया है। माना जा रहा है कि कंपनी संभावित कानूनी और वित्तीय जोखिमों को देखते हुए टकराव की स्थिति खत्म करना चाहती है।
कितना बड़ा हो सकता है जुर्माना?
भारतीय प्रतिस्पर्धा कानून के तहत यदि किसी कंपनी को प्रतिस्पर्धा-विरोधी गतिविधियों का दोषी पाया जाता है, तो उस पर उसके कारोबार के आधार पर भारी आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। इसी संभावित जोखिम को देखते हुए Apple अब जांच एजेंसी के साथ सहयोगात्मक रुख अपनाती दिखाई दे रही है।
भारत Apple के लिए क्यों अहम है?
भारत Apple के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में शामिल है। कंपनी यहां iPhone निर्माण बढ़ाने के साथ-साथ अपने रिटेल और डिजिटल कारोबार का भी विस्तार कर रही है। ऐसे में नियामकीय विवाद का लंबा खिंचना Apple की कारोबारी रणनीति पर असर डाल सकता है।
App Store मॉडल पर बढ़ रहा वैश्विक दबाव
Apple का App Store मॉडल केवल भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में नियामकीय जांच के दायरे में रहा है। यूरोप, अमेरिका और अन्य बाजारों में भी कंपनी पर डेवलपर्स से शुल्क वसूलने और भुगतान प्रणाली को लेकर सवाल उठाए गए हैं। भारत में चल रही जांच का नतीजा भविष्य में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और ऐप इकोनॉमी से जुड़े नियमों पर भी असर डाल सकता है।