भोपाल-सहित 8 शहरों में भारी प्रदूषण, एनजीटी ने सरकार से मांगी रिपोर्ट

Update: 2026-01-08 03:50 GMT

राजधानी भोपाल, इंदौर समेत मध्य प्रदेश के आठ शहरों में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने गंभीर चिंता जताई है। एनजीटी ने राज्य सरकार से आठ सप्ताह के भीतर प्रदूषण के कारणों और रोकथाम के लिए किए गए उपायों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।  एनजीटी ने माना कि भोपाल में वायु गुणवत्ता निर्धारित मानकों से बहुत नीचे है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अब “बहुत खराब” से “गंभीर” श्रेणी में पहुंच गया है। एनजीटी की भोपाल बेंच ने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए गंभीर संकट बताया है।

याचिका पर एनजीटी ने जताई चिंता

भोपाल निवासी राशिद नूर खान की याचिका पर बुधवार को एनजीटी ने प्रदूषण पर गंभीर चिंता व्यक्त की। याचिका की पैरवी अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने की। एनजीटी ने आदेश में कहा कि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, देवास, सागर और सिंगरौली में वायु प्रदूषण के स्तर लगातार राष्ट्रीय मानकों से अधिक हैं।  एनजीटी ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा इन आठ शहरों के लिए गठित संयुक्त कमेटी के माध्यम से छह सप्ताह में स्थिति का आंकलन कर रिपोर्ट पेश करने को कहा। इस समिति में पर्यावरण विभाग, नगरीय प्रशासन, परिवहन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।

भोपाल की वायु गुणवत्ता गंभीर स्थिति में

एनजीटी ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि भोपाल, जिसे “झीलों की नगरी” कहा जाता है, शीतकाल में लगातार धुंध, कम दृश्यता और “बहुत खराब” से “गंभीर” श्रेणी के वायु गुणवत्ता सूचकांक का सामना कर रहा है। रियल-टाइम आंकड़ों के अनुसार कई रातों में AQI 300 से ऊपर दर्ज किया गया। एनजीटी ने कहा कि यह प्रदूषण किसी एक कारण से नहीं बल्कि पराली जलाना, निर्माण कार्य, वाहनों के उत्सर्जन, खुले में कचरा जलाना, लैंडफिल आग, पटाखों का उपयोग और औद्योगिक गतिविधियां—इन सभी का संयुक्त प्रभाव है।

पीएम 10 और पीएम 2.5 के स्तर भी बहुत उच्च हैं। भोपाल में पीएम 10 का वार्षिक औसत 130-190 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और पीएम 2.5 का स्तर 80-100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया है, जो निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक है।

Tags:    

Similar News