स्लॉटर हाउस में कटता रहा गौवंश, सोता रहा निगम प्रशासन

Update: 2026-01-09 06:32 GMT

पीएचक्यू के सामने पकड़े गए ट्रक में गौमांस की पुष्टि के बाद हरकत में आया नगर निगम, स्लॉटर हाउस पर लगाया ताला

राजधानी भोपाल में नगर निगम की लापरवाही और कथित मिलीभगत का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जन सहभागिता मॉडल पर संचालित नगर निगम के स्लॉटर हाउस में गौवंश के वध की पुष्टि हो गई है। 17-18 दिसंबर की रात पुलिस मुख्यालय के सामने पकड़े गए ट्रक में भरे मांस के नमूनों की मधुरा प्रयोगशाला में जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि वह गौमांस था।

गौमांस की पुष्टि के बावजूद नगर निगम प्रशासन की चुप्पी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कार्रवाई की मांग को लेकर गुरुवार को विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पुलिस आयुक्त कार्यालय के सामने जोरदार नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।

एफआईआर दर्ज, दो गिरफ्तार, पर बड़े चेहरे अब भी बाहर

मांस के नमूनों में गौमांस पाए जाने के बाद पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में मृत पशुओं को उठाने का ठेका लेने वाला असलम कुरैशी और ट्रक चालक शामिल हैं। सूत्रों के अनुसार स्लॉटर हाउस के संचालक असलम चमड़ा को भी हिरासत में लिया गया है, हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। गौमांस की पुष्टि की भनक लगते ही नगर निगम प्रशासन ने आनन-फानन में गुरुवार को स्लॉटर हाउस पर ताला लगा दिया, जिससे यह सवाल और गहरा हो गया कि क्या अब तक सब कुछ जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा था?

निगम अधिकारी क्यों कटघरे में?:

नगर निगम का स्लॉटर हाउस पीपीपी मॉडल पर संचालित जरूर है, लेकिन उसकी निगरानी और नियंत्रण की जिम्मेदारी निगम प्रशासन की ही है। नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, गौवंश का वध तो नहीं हो रहा, यह देखना निगम अधिकारियों का दायित्व था। जिस दिन ट्रक पकड़ा गया, उसी दिन स्लॉटर हाउस में मृत पशुओं के अवशेषों की जांच क्यों नहीं की गई? क्या यह केवल लापरवाही थी या फिर संरक्षण और सांठगांठ?

26 टन मांस से भरा ट्रक पकड़ा, फिर भी छोड़ दिया गया

17 दिसंबर की रात विहिप-बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पीएचक्यू के सामने 26 टन मांस से भरा ट्रक पकड़ा था। कार्यकर्ताओं ने तभी गौमांस होने का आरोप लगाया और प्रदर्शन किया। पुलिस ने नमूने जांच के लिए भेजे और पूरा ट्रक छोड़ दिया। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि एक स्लॉटर हाउस में संदिग्ध मांस काटकर पैकेट में पैक किया जाता है और उसे हैदराबाद-मुंबई के रास्ते विदेश भेजा जाता है। सवाल यह है कि जब ट्रक पकड़ा गया था, तब नगर निगम और पुलिस ने तत्काल स्लॉटर हाउस की तलाशी क्यों नहीं ली?

विहिप बजरंग दल का आरोप: अधिकारियों की मिलीभगत

गौमांस की पुष्टि के बाद मामले को दबाने के प्रयास का आरोप लगाते हुए विहिप-बजरंग दल ने गुरुवार को पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। विहिप के विभाग सह मंत्री हरिओम शर्मा ने आरोप लगाया कि मृत पशुओं को उठाने का ठेका लेने वाला असलम कुरैशी ही स्लॉटर हाउस का संचालन भी कर रहा था, जो नियमों का खुला उल्लंघन है। उन्होंने सवाल उठाया कि पशु को स्वस्थ घोषित करने वाले चिकित्सक पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? स्लॉटर हाउस प्रभारी और संबंधित निगम अधिकारियों को अब तक क्यों बख्शा गया? विहिप बजरंग दल का दावा है कि बीते छह महीनों में गौवंश मांस से जुड़े 10-12 मामलों को पकड़कर गौमाता को बचाया गया, लेकिन हर बार पुलिस ने दोषियों को बचाने का प्रयास किया।

मुझे कोई जानकारी नहीं

गौवंश का मांस होने की आधिकारिक सूचना अभी मुझे प्राप्त नहीं हुई है। यदि ऐसा पाया जाता है तो दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी। गौवंश की हत्या जैसा आपराधिक कृत्य सहन नहीं किया जाएगा।

किशन सूर्यवंशी, समापति, नगर निगम भोपाल  

निगम का हस्तक्षेप नहीं था

स्लॉटर हाउस पीपीपी मॉडल पर संचालित हो रहा है। निगम का सीधा हस्तक्षेप नहीं था। शेष जानकारी पता कर बताऊंगी।

संस्कृति जैन, नगर निगम आयुक्त, भोपाल

सवाल कायम है

जब गौमांस ट्रक में पकड़ा गया था, तब तक प्रशासन क्यों सोता रहा? क्या छोटे आरोपियों पर कार्रवाई कर बड़े दोषियों को बचाने की तैयारी है? और क्या नगर निगम की जिम्मेदारी केवल ताला लगाने तक ही सीमित है? यह मामला केवल गौवंश वध का नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और कानून के व्यावसायिक इस्तेमाल का भी है।

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