सेहत से खिलवाड़: सरकारी आहार के नाम पर मरीजों के साथ धोखा

Update: 2026-01-06 05:31 GMT

जिला अस्पताल में मरीजों का भोजन निगल रही ठेका एजेंसी

भोपाल के सबसे बड़े जयप्रकाश अस्पताल (जेपी) में भर्ती मरीजों को दिए जाने वाले दैनिक आहार के नाम पर सरकार और मरीजों के साथ धोखा हो रहा है। अधिकारियों की अनदेखी, मिलीभगत और लापरवाही के चलते मरीजों का दैनिक आहार (डाइट) ठेका लेने वाली एजेंसी द्वारा अपर्याप्त, गुणवत्ताहीन और बेस्वाद भोजन के रूप में परोसा जा रहा है। वहीं, उन मरीजों के लिए भी भोजन का भुगतान एजेंसी को किया जा रहा है जो सरकारी भोजन नहीं लेते।

मरीजों का दर्द

मरीज सोनू द्विवेदी ने बताया. कि भोजन में कच्ची या जली हुई रोटियां, चावल में सिर्फ पानी, पतली पत्तागोभी की सब्जी परोसी जाती है. खाना बिल्कुल भी खाने लायक नहीं है। पांच दिनों में केवल एक बार भोजन लिया. जिसके पास बर्तन नहीं, उसे भोजन नहीं दिया जाता.

बर्तन नहीं तो भोजन नहीं

ठेका एजेंसी द्वारा मरीजों को बर्तन या चाय का कप नहीं दिया जाता। बर्तन न होने पर भोजन भी नहीं दिया जाता। एजेंसी की प्रबंधक श्रीमती मुमताज का कहना है कि मरीज थाली चुरा ले जाते हैं, इसलिए बर्तन नहीं दिए जाते। वहीं, मरीज भोजन लेने से मना कर देते हैं।

सरकारी खाना बिल्कुल अच्छा नहीं

मरीज सावून बाई बताती है. कि बची-खुची और जली हुई रोटियां, मटर और मूली की सब्जी मैंने कभी नहीं खाई, जो वहां मिलती है। सुबह आधा गिलास से कम दूध मिलता है, जबकि हास्पिटल को पूरा देना चाहिए। सलाद के नाम पर खीरा-ककड़ी के कुछ टुकड़े मिलते हैं

इनका कहना है

यदि ठेका एजेंसी मरीजों के आहार में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी कर रही है, तो उसका टेंडर निरस्त कर नए सिरे से टेंडर बुलवाया जाएगा। वार्ड में जाकर निरीक्षण कर इसकी जांच की जाएगी।

- संजय जैन, शिथिल सर्जन सह अधीक्षक, जयप्रकाश जिला अस्पताल, भोपाल

मरीजों को प्रतिदिन सेजु (माप के अनुसार) भोजन दिया जाता है। हमारे पास भोजन के लिए सामग्री है, लेकिन छुट्टी के दिनों में मरीज भोजन लेकर घर चले जाते हैं, इसलिए खाली भोजन दिया जाता है। मरीज अपने ही बर्तन में भोजन लेना पसंद करते हैं।”

मुमताज खान, जेपी अस्पताल प्रभारी, रूपा इंटरप्राइजेज, कोलकाता (ठेका एजेंसी)

जेपी अस्पताल में मरीजों के लिए प्रावधानित भोजन

सुबह का नाश्ता

दूध 125 एमएल

4 बिस्किट (मंगल/शुक्र/रविवार को 4 टोस्ट/रस्क)

एक प्लेट पोहा/उपमा

केला दो नग (मंगल, शुक्र, रविवार को पपीता)

दोपहर का भोजन

सलाद 50 ग्राम

रोटी 3-4 नग (120 ग्राम)

हरी सब्जी एक कटोरी (100 ग्राम)

दाल (अरहर या खड़ी मूंग) एक कटोरी (30 ग्राम)

नमकीन दलिया 1 कटोरी/100 ग्राम (मंगल/शुक्र/रविवार को चावल 150 ग्राम)

शाम (मध्यान्ह)

चाय एक कप (125 एमएल)

बिस्किट

रात्रि भोजन

रोटी 3-4 नग

हरी सब्जी एक कटोरी (100 ग्राम)

दाल (अरहर या खड़ी मूंग) एक कटोरी (30 ग्राम)

दूध एक गिलास (250 एमएल)

गर्भवती महिलाएं: भोजन के अतिरिक्त प्रति दिन 2 गुड़-मेवा के लड्डू दिए जाते हैं।

ठेका एजेंसी द्वारा मरीजों को परोसा जा रहा भोजन

सुबह नाश्ता

चाय 50-70 एमएल

2 रुपये कीमत के बिस्किट

दूध 100 एमएल

लगभग 100 ग्राम पोहा (प्रतिदिन नहीं)

जो नहीं दिया जा रहा-बिस्किट के स्थान पर तीन दिन टोस्ट/रस्क, केला या पपीता नहीं दिया जाता।

दोपहर भोजन

सलाद (खीरा/ककड़ी के 3-4 टुकड़े)

रोटी 3-4 नग

हरी सब्जी (सेम, पत्तागोभी, लौकी) 60-70 ग्राम

दाल (खड़ी मूंग) 60-70 ग्राम

जो नहीं दिया जा रहा

पत्तागोभी, सेम की सब्जियों में पर्याप्त पानी नहीं होता। पतली दाल, नमकीन दलिया, चावल नहीं दिया जाता।

शाम (मध्यान्ह)

चाय 50-70 एमएल

2 रुपये कीमत के बिस्किट

रात्रि भोजन

रोटी 3-4 नग

हरी सब्जी (पत्तागोभी की पतली सब्जी) 60-70 ग्राम

पतली दाल 60-70 ग्राम

जो नहीं दिया जा रहा-मिक्स सलाद, चावल, नमकीन दलिया और 250 ग्राम दूध नहीं दिया जाता।

गर्भवती महिलाएं:भोजन के अतिरिक्त 2 गुड़-मेवा के लड्डू प्रतिदिन नहीं दिए जा रहे।

ठेका एजेंसी ने कम दर पर लिया ठेका

मरीजों के आहार (डाइट) का ठेका 1 जनवरी 2024 को कोलकाता की एजेंसी रूपा इंटरप्राइजेज ने तीन साल के लिए लिया है। प्रति मरीज, प्रतिदिन की सरकारी दर 98 रुपये थी, लेकिन एजेंसी ने 38 रुपये कम, यानी 60 रुपये प्रति दिन के हिसाब से ठेका लिया है। हालांकि भोजन की खराब गुणवत्ता और बर्तन न होने के कारण आधे से अधिक मरीज यह भोजन नहीं लेते। बावजूद इसके भुगतान भर्ती मरीजों की संख्या के आधार पर किया जाता है।

Similar News