सुरखी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक एवं राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के निर्वाचन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी नीरज शर्मा द्वारा दायर नई याचिका पर सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इसे प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने से इंकार कर दिया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव के दौरान गोविंद सिंह राजपूत ने अपनी संपत्ति का सही और पूर्ण विवरण निर्वाचन आयोग के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया।
साथ ही, इस मामले को लेकर निर्वाचन आयोग को की गई शिकायत पर वर्षों से कोई निर्णय न लिए जाने को लेकर आयोग की कथित निष्क्रियता को भी चुनौती दी गई है। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा एवं न्यायमूर्ति विनय सराफ की खंडपीठ के समक्ष हुई। इस दौरान निर्वाचन आयोग और गोविंद सिंह राजपूत की ओर से याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर आपत्ति उठाई गई। अधिवक्ताओं ने दलील दी कि शिकायत पहले से निर्वाचन आयोग के समक्ष लंबित है, राज्य सरकार को पक्षकार नहीं बनाया गया है तथा यह याचिका जनहित याचिका के रूप में प्रस्तुत की गई है, जबकि मामला व्यक्ति विशेष से जुड़ा है। इसके साथ ही मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगाने का मौखिक आग्रह भी किया गया।
हाईकोर्ट ने दलीलें स्वीकार नहीं कीं हालांकि, हाईकोर्ट ने इन सभी दलीलों को स्वीकार नहीं किया। न्यायालय ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी प्रतिनिधित्व या शिकायत को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता। यदि निर्वाचन आयोग शिकायत को सुनवाई योग्य नहीं मानता था, तो उसे समय रहते खारिज किया जाना चाहिए था। कोर्ट ने मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगाने के आग्रह को भी खारिज कर दिया।
मामले में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया गया हाईकोर्ट ने नीरज शर्मा की इस नई याचिका को वर्ष 2025 में दायर पूर्व याचिका क्रमांक 36367/2025 के साथ संलग्न करते हुए कहा कि फिलहाल मामले में कोई अंतिम आदेश पारित नहीं किया जा रहा है। प्रकरण की अगली सुनवाई ९ जनवरी को संभावित बताई जा रही है। अगली सुनवाई में यह उम्मीद जताई जा रही है कि निर्वाचन आयोग को अब तक की गई कार्रवाई अथवा निर्णय न लेने के कारणों का विस्तृत विवरण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना पड़ सकता है।